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गोपबंधु दास जी को भारत रत्न से सम्मानित कराने के प्रयास तेज

उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास के समाज सेवा और गरीबों के प्रति उनके स्नेह की वजह से उन्हें में इन्हें गरीबों के दोस्त के रूप में जाना जाता था...

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gopbandhu das ji file photo

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महेश शर्मा की रिपोर्ट...

(भुवनेश्वर): दीन दुखियों की सेवा में पूरा जीवन खपा देने वाले उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास के 90वें श्राद्ध दिवस पर उन्हें भारत रत्न से विभूषित कराने के लिए हर संभव कोशिश शुरू हो गई हैं। बीड़ा कीट (कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग) और किस (कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज) के संस्थापक डा.अच्युत सामंत ने उठाया है।

डा.अच्युत सामंत ने कहा कि वह राज्य और केंद्र सरकार स्तर पर इसके लिए प्रयास करेंगे। उत्कल मणि गोपबंधु दास का सम्मान ओडिशा का सम्मान होगा। गोपबंधु दास का ओडिया अखबार भी 98 साल पूरे कर रहा है। श्राद्ध दिवस के अवसर पर विश्व के पहले आदिवासी छात्रों की यूनिवर्सिटी किस में उनके नाम पर चेयर और रिसर्च सेंटर का भी कॉलेज कैंपस में उद्घाटन किया गया।

बीजू जनता दल से राज्यसभा में निर्वाचित हुए डा.सामंत ने एक बातचीत में बताया कि वह इस पर राज्य सरकार से बातचीत करेंगे और सभी जरुरी प्रक्रिया के लिए समस्त औपचारिकता पूरी करेंगे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि लोक सेवक मंडल के अध्यक्ष दीपक मालवीय ने गोपबंधु दास के मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा वर्ग सेवा के क्षेत्र में आकर देश को प्रगति के मार्ग पर ले जाएं। उन्होंने कहा कि गोपबंधु दास का नाम उनके काम के कारण है। वह किसी भी नागरिक सम्मान से बड़े हैं। इस मौके पर निरंजन रथ, सुसांत महंति, आदि ने भी विचार व्यक्त किए।

गरीबों के दोस्त थे दास

बता दें कि गोपबंधु दास का जन्म सन् 1877 ई में पुरी जिले के सत्यवादी थाना के अंतर्गत सुआंडो गांव में हुआ था। दास ओडिशा के महान क्रांतिकारी थे। स्वतंत्रता संग्राम ने इन्होंने अद्वितीय योगदान दिया था। उनके समाज सेवा और गरीबों के प्रति उनके स्नेह की वजह से उन्हें में इन्हें गरीबों के दोस्त के रूप में जाना जाता था।

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