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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स ​की रैंकिंग में पिछड़ा ओडिशा फिर कमर कसेगा

एक तो पहले ही सीआईसीआई यानी कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंटस्ट्रीज ने मेक इन ओडिशा -द्वितीय कान्क्लेव से खुद को अलग करके बीजद सरकार को तगड़ा झटका दिया है ऊपर से रैंकिंग में पिछड़ना चिंता का विषय बना है...

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महेश शर्मा की रिपोर्ट...

(भुवनेश्वर): ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में ओडिशा के फिसलकर 14 वें स्थान पर चले जाने से राज्य सरकार की पेशानी पर बल पड़ने लगे हैं। इसी साल 11 से 15 नवंबर तक भुवनेश्वर में विश्वस्तरीय इनवेस्टर मीट (निवेशक सम्मेलन) होने वाली है। समझा जाता है कि 14वें रैंक पर फिसलने के कारण हो सकता है कि निवेशकों में राज्य में निवेश को लेकर हिचकिचाहट हो लेकिन राज्य के उद्योग विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा कहते हैं कि विभागीय समन्वय से राज्य की प्रगति में जो भी अड़चने हैं दूर की जाएंगी। यह राज्य देश में प्रगति की मिसाल बनेगा।

एमओयू के बाद सीआईआई पलटी

एक तो पहले ही सीआईसीआई यानी कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंटस्ट्रीज ने मेक इन ओडिशा -द्वितीय कान्क्लेव से खुद को अलग करके बीजद सरकार को तगड़ा झटका दिया है ऊपर से रैंकिंग में पिछड़ना चिंता का विषय बना है। फरवरी 2018 में सीआईआई और राज्य सरकार के बीच पार्टनरशिप को लेकर एक एमओयू भी हस्ताक्षर किया गया था । उल्लेखनीय है कि मेक इन ओडिशा का प्रथम संस्करण 2016 में हुआ था जिसमें निवेशकों से 2.3 लाख करोड़ के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे ।

सामूहिक प्रयास किए जाएंगे

ओडिशा के उद्योग विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा कहते हैं कि गैप भरने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे। उनका कहना है कि 2016 में कंप्लायंस प्रतिशत 92 था । हालांकि अबकी यह 97.8 प्रतिशत रहा पर रैंकिंग में फीडबैक के भी जुड़ने से रैंकिंग पर असर पड़ा है। यह फीडबैक बड़े और एमएसएमई उद्योगों से लिया जाता है जो संतोषजनक नहीं रहा। उन्होंने बताया कि फीडबैक और कंप्लायंस को जोड़ने से रैंकिंग कम हुई। फीडबैक पुअर क्यों रहा, इस पर सुधार किया जाएगा। उनका कहना है कि सुधार की बहुत गुंजाइश है ।

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