
pregnant woman file photo
महेश शर्मा की रिपोर्ट...
(भुवनेश्वर): एड्स के प्रति जागरूकता के सरकारी अभियान के मुंह पर बलंगीर जिला अस्पताल ने एक एचआईवी संक्रमित महिला का प्रसव अस्पताल में कराने से इंकार करके तमाचा जड़ दिया। प्रसव पीड़ा से छटपटाती उस महिला ने अस्पताल के बरामदे में ही बच्ची को जन्म दिया। यह घटना रविवार की रात की है।
जच्चा-बच्चा की हालत स्थिर
महिला और उसके परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सीय स्टाफ पर भेदभाव के आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने यदि ध्यान दिया होता तो यह घटना न घटती। बरामदे में ही बच्चा जनने वाली जच्चा और उसका बच्चा दोनों ही ठीक ठाक बताए जाते हैं। प्रसव पीड़ित महिला की शिकायत है कि एचआईवी पॉजीटिव होने के कारण अस्पताल के अधिकारियों ने उसे बेड देने से इंकार कर दिया। दुख तो यह कि उसे चिकित्सीय मदद के बजाय डाक्टरों तक ने हिकारत की नजर से देखा।
पहले किया भर्ती, एडस पॉजिटिव आने पर बाहर निकाला
रिपोर्ट के अनुसार बलंगीर जिले के च्यूडापल्ली एरिया की रहने वाली प्रसुता को रविवार को हालांकि पहले जिला अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। पर परीक्षण के बाद जब डाक्टरों को पता चला कि वह एचआईवी पॉजीटिव है तो उसे बेड देने से इंकार कर दिया। डाक्टरों ने लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) से छटपटाती महिला को बरामदे में ले जाकर छोड़ने का निर्देश नर्सों को दिया। बाद देर रात महिला ने बच्ची को जन्म दिया। सामाजिक कार्यकर्ता सुलोचना बहिधर ने इस अमानवीय कृत्य के लिए चिकित्सा स्टाफ पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। सुलोचना ने इसे मानवता के विरुद्ध आचरण बताया। घटना की सूचना मिलने पर मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी ने जांच के आदेश दिए। उन्होंने घटना की जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
09 Jul 2018 02:05 pm
बड़ी खबरें
View Allभुवनेश्वर
ओडिशा
ट्रेंडिंग
