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(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): ओडिशा विधानसभा में मिठास पर जंग छिड़ गयी। मुद्दा वही रसगुल्ला। ओडिशा सरकार की ओर से बयान आया कि पुख्ता दावेदारी कर दी गयी है। अबकी पश्चिम बंगाल ठहर नहीं पाएगा। ओडिशा सरकार ने जीआई (ज्योग्राफिकल इंडीकेशन) टैग के लिए सभी जरूरी कागजात दाखिल कर दिए हैं। यह जानकारी सूक्ष्म लघु एवं मध्यम विभाग के मंत्री प्रफुल्ल सामल ने यह जानकारी शुक्रवार को विधानसभा में एक सवाल के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि सरकार जीआई टैग आफिस चैन्नई के संपर्क में है। कागजी कार्रवाई चल रही है। रसगुल्ला ओडिशा का है और रहेगा।
उनका कहना है कि 12 अगस्त को सभी कागजात दाखिल किए जा चुके हैं। जीआई टैग आफिस के 14 बिंदुओं पर ओडिशा सरकार ने जानकारी दी है। यह ओडिशा के दावे को पुख्ता करते हैं। राज्य के लघु उद्योग विभाग ने जीआई टैग के लिए फरवरी में एप्लाई किया था। मालूम हो कि पश्चिम बंगाल को रसगुल्ला का जीआई टैग नवंबर 2017 में दे दिया गया था। सरकार समय पर अपना दावा पेश नहीं कर पायी थी।
हाईकोर्ट में भी सुनवायी जारी
जीआई (ज्योग्राफिकल इंडीकेशन) टैग को लेकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच यह लड़ाई ओडिशा हाईकोर्ट तक जा पहुंची। ओडिशा हाईकोर्ट ने 9 मई 2018 को पश्चिम बंगाल को रसगुल्ला का जीआई टैग बंगालर रसगुल्ला के नाम से देने के फैसले को चुनौती देने संबंधी एक पीआईएल की सुनवायी के दौरान दोनों राज्यों को नोटिस जारी करके जरूरी सूचना तलब की है। हाईकोर्ट ने ओडिशा सरकार के चीफ सेक्रेटरी और पश्चिम बंगाल स्टेट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी नोटिस जारी किया है। नोटिस श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और चैन्नई इंटलेक्चुअल प्रापर्टी आफिस (आईपीओ) को भी जारी किया गया है । यह पीआईएल पांच फरवरी को ओडिशा हाईकोर्ट में पुन्य उत्कल फाउंडेशन के सचिव सुशांत साहू व ओडिशा प्रभा के संपादक संतोष कुमार साहू ने दायर की थी ।
Published on:
08 Sept 2018 02:25 pm
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