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धुन के पक्के हैं राज्यसभा में मनोनीत संगतराश पद्मविभूषण रघुनाथ महापात्र

रघुनाथ महापात्र सिर्फ कक्षा तीन तक पढ़े हैं। धुन के पक्के इस कलाकार को उसकी मेहनत और लगन कहां तक ले आई।

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(महेश शर्मा की रिपोर्ट)

भुवनेश्वर। महाप्रभु जगन्नाथ के महाभक्त पद्मविभूषण रघुनाथ महापात्र को राज्यसभा की सदस्यता के लिए मनोनीत किया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर यह मनोनयन किया है। बहुत कम लोग जानते हैं कि संगतराश पद्मविभूषण रघुनाथ महापात्र सिर्फ कक्षा तीन तक पढ़े हैं। धुन के पक्के इस कलाकार को उसकी मेहनत और लगन कहां तक ले आई। वह इसे महाप्रभु का प्रसाद भर मानते हैं। वह कहते हैं कि रथयात्रा पर्व पर जगन्नाथ भगवान ने राज्यसभा की सदस्यता के रूप में एक उपहार दिया है। देश की कला को विश्व में पहचान दिलाने का यह अवसर है। 75 साल पार कर चुके महापात्र कहते हैं कि वह सौ पार करेंगे। आदित्यनारायण मंदिर बनने के बाद ही उन्हें कुछ हो सकता है। सन् 1960 से 1990 तक उन्होंने तीन हजार कारीगर तैयार किए। चार सौ तो उनकी वर्कशाप में अभी भी काम कर रहे हैं।


14 भव्य मंदिर बनाने का रिकार्ड


बालासोर में जगन्नाथ मंदिर बना चुके महापात्र के खाते में 14 भव्य मंदिर बनाने का रिकार्ड दर्ज है। अब वह सौ एकड़ में कोर्णाक की तर्ज पर नया सूर्य मंदिर आदित्यनारायण मंदिर के नाम से बनाने का संकल्प लिए हैं। इस पर काम चल रहा है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उनकी कला के मुरीद है। कोई चार-पांच माह पहले उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र ने पीएम आफिस में बुलाया था। एजेंडा यही आदित्यनारायण मंदिर निर्माण के साथ ही इस कला का प्रमोशन था। उन्होंने भुवनेश्वर स्थित अपनी वर्कशॉप में हूबहू कोणार्क मंदिर जैसी दीवार, सूर्य के रथ के पहिए और उसके आसपास नक्काशी करके इशारा दे दिया है कि उनके जेहन में क्या है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक खुद वर्कशाप जाकर उनके हुनर का गवाह बने। जीर्णशीर्ण हो चुका कोणार्क मंदिर फिलहाल भव्यता खो रहा है। इसे बचाने के लिए गर्भगृह से सूर्य देवता की मूर्तियां 117 साल पहले हटा ली गई थीं। लगातार टूट रहे इस ढांचे को बचाने के लिए मोटे-मोटे पाइप लगाकर वास्तविक स्वरूप में लाने की मैराथन कवायद जारी है।

ड्रीम प्रोजेक्ट से हैरान रह गए पटनायक


भुवनेश्वर में ही एक कार्यक्रम में जब महापात्र ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की जानकारी दी तो वे हैरान हो गए। इस पर पटनायक मुस्करा दिए। लेकिन धार्मिक स्थल के लिए जमीन देने का प्रावधान न होने के कारण सरकार ने हाथ खींच लिए। पटनायक ने वर्कशॉप में कोणार्क मंदिर की दीवार बनाने के काम का उद्घाटन भी किया। उनके नाम की पट्टिका आज भी वहां लगी है। पुरी के साक्षीगोपाल नामक स्थान पर मंदिर बनाने की योजना है। यहां सौ एकड़ जमीन की जरूरत है जिसके प्रबंध में रघुनाथ महापात्र और उनकी टीम जी-जान से जुटी है। अब तक 60 एकड़ जमीन ले ली गई है और 22 एकड़ का एग्रीमेंट हो चुका है। महापात्र कहते हैं कि उन्होंने साल भर पहले प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र से समय लेकर उन्हें डिजाइन, अलबम आदि दिया था। बाद में मिश्र का पत्र मिला कि यदि यह प्रोजेक्ट पर्यटन मंत्रालय के निर्धारित मानकों में आता है तो सरकार जरूर मदद करेगी। इसके बाद कुछ नहीं हुआ। महाप्रभु जगन्नाथ सब रास्ता बनाते जा रहे हैं।