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(भुवनेश्वर): एक और जहां मओवादी क्षेत्र को ओडिशा से जोडने वाले नवनिर्मित गुरूप्रिया पुल का माओवादी विरोध कर रहे है वहीं दो कुख्यात माओवादियों ने मुख्य धारा में आने के लिए पुलिस अधिक्षक जगमोहन मीणा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। दोनों का कहना है कि वह एक सामान्य इंसान की तरह जीवन यापन करना चाहता हैं। पुलिस अधिक्षक ने दोनों के फैसले को खूब सराहा है साथ ही उनका कहना है कि मुख्यधारा में आने के लिए माओवादियों को बेझिझक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देना चाहिए इससे राज्य की माओवाद की समस्या आसानी से हल हो सकती है।
यह कहना है आत्मसर्पण करने वाले माओवादियों का
रविवार को मलकानगिरि पुलिस अधीक्षक जगमोहन मीणा के समक्ष दो माओवादियों वागा उरमानी उर्फ मुकेश और मुडे माझी उर्फ रत्ना ने आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में रत्ना का कहना है कि उनका एक साथी महिलाओं पर बुरी नजर रखता है। उसका नाम धनंजय गोप है। वह बिना किसी कारण के लोगों की हत्याएं करता है। उसकी हरकतों को रत्ना पसंद नहीं करती थी, इसलिए आत्मसमर्पण कर दिया। दूसरी तरफ मुकेश पर चार लाख का इनाम था, जबकि रत्ना पर एक लाख का। दोनों का कहना है कि वह मुख्यधारा में आकर नई जिंदगी बिताना चाहते हैं। दोनों पर ही कई हत्याओं, बारुदी सुंरंग विस्फोट, अपहरण आदि के आरोप हैं।
इधर पुल के विरोध में निकाला जा रहा जुलूस
गुरुप्रिया पुल लोकार्पण के विरोध में माओवादियों ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। माओवादियों के नेता रबाना के नेतृत्व में तकरीबन 600 आदिवासी लोग एकत्र हुए। ओडिशा आंध्र के सीमावर्ती क्षेत्र में पहले सभा हुई जिसमें राज्य और केंद्र के माओ आंदोलन को रौंदने के मंसूबे बताए गए। रबाना का कहना है कि गुरुप्रिया पुल इसी की देन है। ये सभी 600 माओ समर्थक रालेगड़ा और कर्कुंडा से माओवादियों की सभा में भाग लेने आए थे।
Published on:
29 Jul 2018 07:24 pm
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