
नक्सल नेटवर्क की टूटी कमर (photo source- Patrika)
मो. इरशाद खान/Naxal Free Bijapur: नक्सल विरोधी अभियान में 3 अप्रैल 2024 बीजापुर के लिए निर्णायक दिन साबित हुआ। इसी दिन लेण्ड्रा-कोरचोली के घने जंगलों में सुरक्षा बलों के विशेष ऑपरेशन ने नक्सल नेटवर्क की कमर तोड़ दी। इसके बाद बदली रणनीति और लगातार आक्रामक कार्रवाई के चलते आज बीजापुर को नक्सलमुक्त बताया जा रहा है।
सटीक खुफिया सूचना के आधार पर 3 अप्रैल 2024 को जवानों ने 13 सशस्त्र नक्सलियों को मार गिराया। मुठभेड़ के बाद मौके से एसएलआर, एलएमजी, .303 रायफल, बीजीएल लॉन्चर सहित भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए। इस ऑपरेशन को पूरे अभियान का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
इस सफलता के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने रणनीति की समीक्षा कर पूरे बस्तर में नई कार्यप्रणाली लागू की। खुफिया तंत्र को मजबूत किया गया, योजनाबद्ध ऑपरेशन शुरू हुए और विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया। इसी रणनीति के तहत कांकेर के तुलथुली, नेशनल पार्क क्षेत्र और अबूझमाड़ में भी अभियान चलाए गए, जहां लगातार सफलता मिली।
3 अप्रैल 2022 को टेकुलगुड़म में हुए मुठभेड़ में 22 जवानों की शहादत ने सुरक्षा बलों को झकझोर दिया था। ठीक दो साल बाद 3 अप्रैल 2024 की सफलता ने जवानों के मनोबल को नई ऊंचाई दी। इस दिन जवानों ने शहीद साथियों को श्रद्धांजलि देते हुए नक्सल सफाए का संकल्प और मजबूत किया।
पिछले दो वर्षों में करीब 300 ऑपरेशन चलाए गए, जिनमें 234 नक्सली मारे गए और 1336 गिरफ्तार किए गए। आत्मसमर्पण के मामलों में भी तेजी आई और अब तक 1081 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। कार्रवाई में सीसीएम, एसजेडसी, डीवीसीएम और एसीएम स्तर के कई बड़े माओवादी नेता मारे गए, जिससे संगठन की कमान कमजोर पड़ गई।
नक्सल प्रभाव कम होने के साथ ही अब बीजापुर में विकास कार्यों को गति मिली है। दूरस्थ गांवों तक सडक़, बिजली, पानी और संचार सुविधाएं पहुंच रही हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है और सरकारी योजनाएं अब अंदरूनी इलाकों तक पहुंच रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ा है और वे तेजी से मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
Published on:
04 Apr 2026 11:13 am
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