
बिजनौर. विवादों घिरे इस्लामिक धर्म प्रचारक डॉ. जाकिर नाईक की किताब को एक इस्लामिक स्कूल में पढ़ाए जाने का मामला सामने आया है। संबंधित खबर एक स्थानीय समाचार पत्र में छपने के बाद इस मामले को लेकर बिजनौर बीएसए महेश चंद्र के निर्देश पर एबीएसए की टीम ने इस स्कूल में जांच करने पहुंची थी। इस स्कूल में जांच के दौरान पता चला कि इस स्कूल में कुछ दिन पहले तक क्लास 2 के छात्रों को 9वें पीरियड में ये किताब पढ़ाई जा रही थी। बहरहाल इस मामले की जांच रिपोर्ट बीएसए बिजनौर महेश चंद्र को भेज दी गई है।
गौरतलब है कि बिजनौर जनपद के किरतपुर क्षेत्र के हरचनपुर ढाकी में इस्लामिक विजन स्कूल में बच्चों को डॉ. जाकिर नाईक की किताब इल्म उन नाफे को पढ़ाये जाने का मामला प्रकाश में आय़ा था। दरअसल, बीएसए के संज्ञान में यह बात आई थी कि इस स्कूल के क्लास फर्स्ट और सेकंड के बच्चों को ये किताब पढ़ाई जा रही है। इस किताब में डॉ. जाकिर नाईक को विवादित न बताकर नायक के रूप में पढ़ाया जा रहा है।
अलीगढ़ के एक स्कूल में भी इस किताब को पढ़ाने का मामला सामने आया था। बिजनौर जनपद में इस किताब को पढ़ाए जाने का माला जब प्रकाश में आया तो शनिवार को बीएसए महेश चंद्र बिजनौर के निर्देश पर शनिवार को किरतपुर एबीएसए शिव कुमार ने अपनी टीम के साथ स्कूल में जांच करने पहुँचे।
जांच पर शिव कुमार ने बताया कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर को लेकर इस मामले की जांच करने मैं गया था, जिसमें स्कूल के बच्चों की जब किताब चेक की गई तो उनमें कुछ भी सामने निकलकर नहीं आया। लेकिन स्कूल के क्लास में लगे टाइम टेबल में ये किताब इल्म-उन-नाफ़े क्लास सेकंड के छात्रों को 9वें पीरियड में पढ़ाये जाने के लिए अंकित थी। इसको लेकर जब स्कूल के संचालक को बुलाया गया तो उसने बताया कि पहले इस किताब को पढ़ाया गया था, लेकिन अलीगढ़ में इस विवादित मामला संज्ञान आने के बाद इस किताब को नहीं पढ़ाया जा रहा है। बहरहाल, एबीएसए शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने जांच रिपोर्ट में जो भी मिला है। उसकी रिपोर्ट बिजनौर बीएसए को भेज दी गई है।
Published on:
4 Feb 2018, 9:54 PM IST
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