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Bijnor : अपनी ही तेरहवीं के दिन जिंदा लौटे युवक को देख उड़े लोगों के होश

यूपी के बिजनौर में एक युवक के अपनी ही तेरहवीं के दिन जिंदा वापस लौटने का मामला सामने आया है। युवक को देख परिजनों और लोगों के होश उड़ गए। परिजनों का दावा है कि उन्होंने मौत होने पर उसका हरिद्वार में अंतिम संस्कार किया था, जिसके बाद उसकी तेरहवीं के भोज का आयाेजन किया गया था।

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कहते हैं कि कोई मर जाए और उसके शरीर का अंतिम संस्कार भी कर दिया जाए तो फिर उसे कोई जीवित नहीं कर सकता। लेकिन, यूपी के बिजनौर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक युवक अपनी तेरहवीं के दिन ही जिंदा वापस लौट आया। युवक को देख परिजनों और लोगों के होश उड़ गए। किसी को भी यकीं नहीं हो रहा था कि वह जिसकी तेरहवीं में शामिल हुए हैं, वह उनके सामने जिंदा खड़ा है। जबकि परिजनों का दावा था कि उन्होंने हरिद्वार में युवक की मौत होने पर उसका वहीं अंतिम संस्कार किया था, जिसके बाद पंडित के सुझाने पर उसकी आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं का आयाेजन किया।

दरअसल, यह हैरान कर देने वाली घटना बिजनौर जिले के हल्दौर थाना क्षेत्र स्थित जगनवाला गांव की है। जहां के रहने वाले योगेश सिंह सैनी के 30 वर्षीय बेटा अंकुर सैनी की 5 महीने पहले हरिद्वार में एक प्राइवेट कंपनी नौकरी के लिए गया था। लोगों ने बताया कि परिजनों ने दावा किया था कि 13 दिन पूर्व हरिद्वार में अंकुर की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिजन हरिद्वार में ही अंकुर के शव अंतिम संस्कार कर दिया, जिसके बाद शुक्रवार को पंडित के कहने पर तेरहवीं का कार्यक्रम रखा गया।

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आते ही परिजनों से लिपटकर रोने लगा अंकुर

अंकुर की तेरहवीं के भोज में रिश्तेदारों के साथ गांव के लोगों को भी बुलाया गया था। इसके साथ ही तेरह पंडितों को भी भोज के लिए आमंत्रित किया गया था। घर में तेरहवीं का कार्यक्रम चल ही रहा था कि इसी बीच अचानक अंकुर भी आ पहुंचा। अंकुर को देख सभी रिश्तेदार और परिवार के लोगों के साथ ग्रामीणों के पैराें तले जैसे जमीन ही न रही। वे बिना पलक झपकाए अंकुर को देख हैरत में पड़ गए। इसके बाद परिजनों ने अंकुर को गले लगा लिया। हालांकि अंकुर कुछ बोल नहीं पा रहा। वह परिजनों से लिपटकर रोता रहा। इसके बाद परिजनों ने तेरहवीं का कार्यक्रम रद्द कर दिया।

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परिजन खामोश

चौकी प्रभारी मनोज कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। इस संबंध में ग्रामीण कुछ बताने को तैयार नहीं हैं। इसके साथ ही अंकुर के परिजनों ने भी खामोशी की चादर ओढ़ रखी है।