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हेम शर्मा/बीकानेर. प्रदेश में जैतून (ऑलिव फल) की खेती के लिए जलवायु की अनुकूलता और राज्य सरकार की ओर से सात फार्म स्थापित करने से इसको बढ़ावा मिल रहा है। लूणकरनसर में जैतून का तेल निकालने का सरकारी संयंत्र स्थापित किया हुआ है। इसके साथ ही इसके फलों से २५ प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाने का सफल प्रयोग हुआ है। जिससे जैतून के फल के विपणन और किसान के आर्थिक लाभ को बढ़ावा मिलेगा।
जैतून रेगिस्तान के लिए वरदान तथा काश्तकारों के लिए आर्थिक संभावनाओं वाली फसल मानी गई है। यह दो तरह से फायदेमंद है। जैतून के मूल्य संवध्र्दन से किसानों की आय बढ़ सकती है वहीं इसके खाद्यान्न मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय से सम्बध्द होम साइंस कॉलेज के खाद्य एवं पोषण विभाग ने जैतून के फलों का प्रसंस्करण कर २५ तरह के व्यंजन बनाए हैं। ये व्यंजन नए उत्पादन है। विभाग ने यह कार्य राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में मिले प्रोजेक्ट के तहत किया है।
कैंडी, पकौड़ा व पिज्जा
जैतून के पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजनों की लम्बी श्रंृखला तैयार की गई है। इसमें जैतून का मुरब्बा, कैन्डी, पकौड़ा, सब्जी, आचार, लॉजी, चीला, उत्तपम, कटलेट, माउथफे्रशनर, इडली, टॉफी, चाय, बड़ी, दही बड़ा, खाखरा, रायता, केक, बिस्किट, पिज्जा, ब्रेड, कुकीज, मेयोनेज, स्प्रेड, सलाद ड्रेसिंग बनाए गए हैं।
ये खाद्य पोषण की दृष्टि से समृध्द होने के साथ-साथ औषधीय गुणों वाले होने से मानव स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। जैतून का हर भाग मानव के आहार में उपयोगी है। इसमें पत्तियां, फल तथा तेल मूल्य संवध्र्दन के लिए भी उपयुक्त है। जैतून की पत्तियों से ग्रीन टी बनाई जाती है। फलों का प्रसंस्करण से कडवापन दूर कर अचार एवं सलाद के रूप में काम लेते हैं। इसके गट्टे, खाखरा भी बनाए जा सकते हैं।
जैतून में यह है पोषक तत्व
जैतून के सौ ग्राम फल में १४६ किलो कैलोरी ऊर्जा , १.०३ ग्राम प्रोटीन, १५.३२ ग्राम वसा, २० मिली ग्राम विटामिन ए, ३.८१ मि.ग्रा. विटामिन ई एवं ५२ मिली ग्राम कैल्शियम है। इसमें एन्टीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।
कई व्यंजन बनाए
जैतून के मूल्य संवध्र्दन की तरफ स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के होम साइंस के कॉलेज के खाद्य और पोषण विभाग का ध्यान गया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विभिन्न तरह के व्यंजन बनाए गए है। जो आमतौर पर खाने में काम आ सकते हैं।
डॉ. विमला डुकवाल, मुख्य अन्वेषक एसकेआरयू बीकानेर
तीन वर्षीय परियोजना में हुए काम
जैतून राज्य सरकार की महत्ती परियोजना है। इसमें जैतून की खेती के साथ मूल्य संवध्र्दित उत्पादों का विकास, पोषकीय मूल्यांकन किया गया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में तीन वर्षीय परियोजना में फल एव उत्पादों का विश्लेषण एवं किसानों को मूल्य संवध्र्दन तकनीक का हस्तान्तरण करने का काम किया जा रहा है।
डॉ. रीमा राठौड़ वरिष्ष्ठ अनुसंधान अध्येता खाद्य एवं पोषण विभाग होम साइंस कॉलेज
Published on:
29 Jun 2018 08:55 am
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