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Bikaner: 10% कमीशन लेकर म्यूल अकाउंट से करवाते ट्रांजैक्शन, टेलीग्राम पर चलता था साइबर ठगी का नेटवर्क, 3 आरोपी गिरफ्तार

Rajasthan Crime: बीकानेर पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए ट्रांजैक्शन कराने वाले 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी 10% कमीशन लेकर देशभर में ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते थे।
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Cyber Fraud Arrested

गिरफ्तार आरोपियों की फोटो: पत्रिका

3 Accused Arrested In Cyber Crime: बीकानेर के साइबर थाना और जेएनवीसी थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपी देशभर में सक्रिय साइबर ठगों को कमीशन के आधार पर 'म्यूल अकाउंट' (दूसरों के बैंक खाते) उपलब्ध कराते थे। ठगी की रकम पहले इन खातों में मंगवाई जाती और फिर उसे गिरोह के निर्देश पर दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इसके बदले आरोपी करीब 10 प्रतिशत कमीशन लेते थे।

सदर वृत्ताधिकारी अनुष्ठा कालिया ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में लालमदेसर बड़ा निवासी रामस्वरूप (20) पुत्र मोहनराम, सीताराम (20) पुत्र बाबूलाल तथा तेजरासर निवासी मुन्नीराम (21) पुत्र हेमाराम शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 15 मोबाइल फोन, 9 सिम कार्ड, 8 एटीएम कार्ड, 3 बैंक पासबुक, 3 चेकबुक, 4 आधार कार्ड, 3 पैन कार्ड तथा बैंकिंग कार्य में प्रयुक्त अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं।

टेलीग्राम ग्रुप से मिलता था 'काम'

साइबर थानाधिकारी शालिनी बजाज के अनुसार, जांच में सामने आया कि साइबर ठगी का मुख्य गिरोह टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से आरोपियों के संपर्क में रहता था। गिरोह देशभर के लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाकर रकम आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में जमा करवाता था। इसके बाद आरोपी राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर अपना कमीशन रख लेते थे। पूछताछ में आरोपियों ने नेटवर्क के संचालन और ठगी के तरीके से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं।

68 लाख के संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिले

पुलिस जांच में आरोपियों के बैंक खातों से अब तक करीब 68 लाख रुपए के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। इन खातों के संबंध में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर देश के विभिन्न राज्यों से पहले से कई शिकायतें दर्ज हैं। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पिछले छह माह से बीकानेर में रहकर इस नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे।

देर रात पुलिस से उलझे, फिर खुला साइबर ठगी का राज

जेएनवीसी थानाधिकारी विक्रम तिवाड़ी ने बताया कि साइबर टीम की सूचना पर डीएसटी के एएसआई दीपक यादव शिवबाड़ी सर्किल पहुंचे थे। वहां देर रात एक कार में तीन युवक संदिग्ध अवस्था में खड़े मिले। पूछताछ करने पर वे पुलिस से उलझने लगे। गश्ती दल की सहायता से तीनों को थाने लाकर पूछताछ की गई, जिसमें साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा हुआ। एएसआई पूर्णाराम की रिपोर्ट पर रामस्वरूप, मुन्नीराम, सीताराम, रामप्रकाश और राधाकिशन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों को मंगलवार को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा।

गांव वालों के नाम पर खुलवाते थे खाते

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे रामप्रकाश और राधाकिशन के लिए काम करते थे। दोनों के कहने पर परिचितों और गांव के लोगों को झांसे में लेकर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। बाद में खाताधारकों की जानकारी के बिना पासवर्ड और बैंकिंग सुविधाओं का दुरुपयोग कर इन खातों को साइबर ठगी में इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस अब फरार रामप्रकाश और राधाकिशन की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

क्या होता है 'म्यूल अकाउंट'?

म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए करते हैं। कई मामलों में खाताधारक लालच या झांसे में आकर अपना खाता उपलब्ध करा देते हैं, जबकि कुछ मामलों में उनकी जानकारी के बिना खाते का दुरुपयोग किया जाता है।