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अन्नपूर्णा दूध योजना: अगर दूध फट गया तो कौन करेगा भुगतान?

सरकारी स्कूलों में दो जुलाई से शुरू होने वाली अन्नपूर्णा दूध योजना शिक्षकों के लिए सिर दर्द बन गई है।

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Annapurna Milk Scheme

Annapurna Milk Scheme

निखिल स्वामी/बीकानेर. सरकारी स्कूलों में दो जुलाई से शुरू होने वाली अन्नपूर्णा दूध योजना शिक्षकों के लिए सिर दर्द बन गई है। योजना के तहत शिक्षकों ही बच्चों को गर्म दूध वितरित करेंगे, लेकिन दूध खराब होने या फटने की स्थिति में बच्चों को दोबारा दूध देने का प्रावधान नियमों में नहीं किया गया है। इससे बच्चों को दूध के बिना भी रहना पड़ सकता है। साथ ही खराब दूध की राशि कौन वहन करेगा, इसका भी उल्लेख नियमों में नहीं है।

शिक्षकों में असमंजस है कि यदि किसी कारण से दूध फट गया तो इसका भुगतान कौन करेगा? शिक्षकों ने बताया कि स्कूलों में नियमित पोषाहार वितरण के साथ बच्चों को सप्ताह में तीन दिन दूध भी पिलाना होगा। इसमें कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों को १५० ग्राम व कक्षा ६ से आठ तक विद्यार्थियों को २०० ग्राम दूध दिया जाना है। इसमें समय जाना होने से शिक्षकों को शिक्षण व्यवस्था चौपट होने की आशंका है।

बर्तन खरीद में व्यस्त
इन दिनों शिक्षक स्कूल के समय ही बाजारों में दूध के लिए बर्तन खरीदने में व्यस्त हैं। शिक्षकों ने बताया कि ज्यादा संख्या वाले छात्रों के स्कूलों में ढाई हजार में बर्तन खरीदना संभव नहीं है, इसके लिए अतिरिक्त राशि आवंटित नहीं की गई है।

लगाना होगा अनुमान
प्रार्थना सभा व योग के बाद बच्चों को गर्म दूध वितरित किया जाएगा, लेकिन शिक्षकों को प्रार्थना सभा से पहले ही छात्रों की संख्या और दूध की मात्रा का अनुमान लगाना होगा।

पढ़ाई होगी प्रभावित
स्कूलों में मिड-डे मील व दूध वितरण में अधिक समय लग सकता है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
श्रवण पुरोहित, प्रदेश मंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)

सप्लायर जिम्मेदार
दूध फटने पर सप्लायर की जिम्मेदारी होगी। अगर वह मना कर दे तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
श्यामसिंह राजपुरोहित, निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर

खरीदते समय संस्थाएं तोल कर दूध देती हैं। यह शिक्षकों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
किशोर पुरोहित, प्रदेश संरक्षक, शिक्षक संघ (भगतसिंह)