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कला को मिले संरक्षण-मांगणियार

बाड़मेर से आए समन्दर खान मांगणियार ने कहा है कि लोककलाओं को संरक्षित करने की दरकार है। फिर चाहे सरकारी स्तर पर हो या निजी स्तर पर। या फिर भामाशाह, संस्थाओं के स्तर पर हो। खासकर मांगणियार, लंगा शैली का गायन, इनके वाद्य एक तरह से लुप्तप्राय: हो रहे हैं। बीकानेर में आयोजित मांड समारोह में आए बाड़मेर के समन्दर सिंह ने पत्रिका से बातचीत में यह जानकारी दी।

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कला को मिले संरक्षण-मांगणियार

बीकानेर. बाड़मेर से आए समन्दर खान मांगणियार ने कहा है कि लोककलाओं को संरक्षित करने की दरकार है। फिर चाहे सरकारी स्तर पर हो या निजी स्तर पर। या फिर भामाशाह, संस्थाओं के स्तर पर हो। खासकर मांगणियार, लंगा शैली का गायन, इनके वाद्य एक तरह से लुप्तप्राय: हो रहे हैं। बीकानेर में आयोजित मांड समारोह में आए बाड़मेर के समन्दर सिंह ने पत्रिका से बातचीत में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में बाड़मेर, जालौर, जैसलमेर व बीकानेर में मांगणियार जाति के कलाकार है, परिवार है। उनके बच्चों के लिए 1982 में बाड़मेर में राष्ट्रीय संगीत विद्यालय की स्थापना की गई थी, लेकिन दो साल बाद 1984 में ही वो बंद हो गया। बच्चे आज भी अपने स्तर पर लोककला को आगे बढ़ा रहे हैं। १९७७ से संगीत कला से जुड़े समन्दर खान अब तक 1०७ देशों में प्रस्तुतियां दे चुके हैं।


शास्त्रीय संगीत जरूरी:नेहा चारण

उदयपुर से आई लोकगायिका नेहा चारण ने कहा है कि युवा सीधे टीवी मंच पर आना चाहता है, लेकिन संगीत में मुकाम हासिल करने के लिए शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखनी जरूरी है। उदयपुर की डॉ. विजय लक्ष्मी दवे से शास्त्रीय संगीत की तालिम प्राप्त करने वाली चारण 2007 से संगीत से जुड़ी है। वर्तमान में मांगणियार शैली की बारीकियां सीख रही है। अगले साल मई में लंदन में होने वाले कार्यक्रम में मांगणियार गु्रप के साथ नेहा प्रस्तुति देगी। उन्होंने कहा कि लोक कला, संगीत के संरक्षण के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।