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सटोरियों के जाल में फंसकर हो रहे कर्जदार, क्रिकेट सट्टे के लिए ‘फंटर’ ले रहे सूद पर रुपए

कई मामलों में तो कर्ज से तंग आकर खुदकुशी तक कर चुके है।

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क्रिकेट सट्टे के काले कारोबार ने शहर से गांव तक पांव पसार लिए है। मजदूर व गरीब तबके के लोग इनमें फंसकर रह गए हैं। वे सट्टे के जाल में फंसकर मोटे ब्याज पर माफिया से पैसा ले रहे हैं। जिसे चुकाने के लिए घर-गहने सब बेचने पड़ रहे हैं। कई मामलों में तो कर्ज से तंग आकर खुदकुशी तक कर चुके है।

आइपीएल सीजन के मैच शुरू होने के बाद सट्टे ने फिर जोर पकड़ लिया है। जबकि पुलिस की अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। जिले में करीब 500 बुकी क्रिकेट सट्टा करवा रहे हैं। वहीं सूद माफिया 5 से 20 रुपए तक सैकड़ा के हिसाब से ब्याज पर पैसा दे रहे हैं।

सट्टे का यह कारोबार गांवों तक भी पहुंच गया है। शहर के साथ ही सटोरिए अपने फार्म हाउस और गांव में ठिकाने बना रखे है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 15 हजार से भी ज्यादा फंटर (सट्टा लगाने वाले) क्रिकेट मैच पर दाव लगा रहे है।

अब कारों में सट्टा
पुलिस की पकड़ से बचने के लिए कुछ सटोरियों ने कारों में ही सट्टे का संचालन करने का नया तरीका निकाला है। एेसे में पुलिस उनके मोबाइल की लोकेशन को ट्रेस भी करती है तो वह जगह बदलकर बच निकलते है। पुलिस मुखबिर तंत्र के सहारे सटोरियों पर जल्द ही कार्रवाई का दावा कर रही है। परन्तु हालात देखकर एेसा नहीं लगता कि पुलिस इस बार आइपीएल सीजन में कुछ करतब दिखा पाएगी।

नई तकनीक के डिवाइस
सटोरियों के पास नई तकनीक के डिवाइस बरामद हो चुके है। पिछले साल पुलिस ने सटोरियों से ऐसे सूटकेस बरामद किए जिनमें नई तकनीक के डिवाइस लगे हुए थे। इनसे एक मोबाइल को जोडऩे पर सभी लाइनों के एक साथ भाव बताए जा सकते हैं। यह भाव सीधे फंटर तक पहुंच जाते हैं। सबसे छोटा मोबाइल सूटकेस पांच से सात लाइनों का होता है। बीकानेर जिलेभर में 82 से 85 बुकी की लाइनें चल रही है। बड़े बुकी सीधे क्रिकेट मैदान से जुड़े हुए हैं।

25 से 30 करोड़ का कारोबार
जिले में 500 से ज्यादा बुकी हैं। कई जगह हर मैच में एक करोड़ रुपए तक का सट्टा लगता है। कुछ छोटी बुक भी चल रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिलेभर में 25 से 30 करोड़ का सट्टा कारोबार हो रहा है।

नेता और व्यापारी भी हिस्सेदार

पुलिस सूत्रों के मुताबिक सट्टा कारोबार में जिले के कई नेता, व्यापारी और बदमाश लिप्त है। कई बड़े नेताओं ने अपनी हिस्सेदारी डाल रखी है। वहीं कुछ नेता चुनावों में सटोरियों से बड़ा चंदा लेते हैं इसलिए बचाव करते है। वर्ष 2016 में राजू ठेहट का चालक रहा बदमाश धीरज शर्मा व गैंग का सदस्य अविनाश सट्टा लगाते पकड़े जा चुके हैं। इसके अलावा प्रदेश के कुख्यात कई बदमाश भी सट्टा कारोबार में लिप्त होने की बात पुलिस के सामने कबूल कर चुके हैं।

खाली चेक या जमीन के कागजात
सूदखोर सट्टे में फंसे लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें पांच से 20 रुपए सैंकड़ा ब्याज के हिसाब से रुपए दे रहे हैं। इनमें ज्यादातर वे ही लोग हैं जो सट्टे में बड़ा घाटा खा चुके होते हैं। सूदखोर गारंटी के लिए खाली चेक या फिर जमीन के कागजात गिरवी रखते हैं।