
संरक्षित विरासत घोषित हो बीकानेर
बीकानेर. बीकानेर एक खूबसूरत शहर है, जो कला, इतिहास के खजाने और समृद्धशाली विरासत को सहेजे हुए है। बीकानेर की स्थापना राव बीका ने 532 साल पहले की थी। यदि पांच दशक पुरानी बात करें तो आज बीकानेर बदल गया है। इसके कई मायने हैं। शहर का विकास और विस्तार हुआ है। यहां के उद्योगों ने सात समंदर पार तक पहचान बनाई है। इनमें ऊन उद्योग, कारपेट, ज्वैलरी सरीखे व्यापार शामिल हैं।
बिजली-पानी सरीखी मूलभूत सुविधाओं मंे आज विस्तार हुआ है, यह काफी सुखद है। लेकिन एक बात मन को हर समय कचोटती है कि इतना प्यारा, अलहदा होते हुए भी मेरे शहर को गंदगी से निजात कब मिलेगी। जहां हर गली-नुक्कड़ पर कचरे का ढेर लगा है, नालियां-सड़कें टूटी-फूटी हैं। नालियांे से दूषित पानी दिन में कई बार सड़क पर आ जाता है। अतिक्रमण की भरमार है। खासकर पुराने शहर में स्थिति विकट है। संकरी गलियों में यातायात जाम होना आम बात है। आवारा पशुओं का आंतक है।
साफ-सफाई की लचर व्यवस्था के लिए किसको दोषी ठहराएं? शासन-प्रशासन या जनता को ही? सच तो यह है कि साफ-सफाई रखने की जिम्मेदारी जितनी प्रशासन की है, उतनी ही स्वयं हमारी भी है। अपने घर के आसपास स्वयं सफाई रखेंगे, कचरे को उपयुक्त स्थान या पात्र में डालेंगे तो यह शहर स्वत: ही स्मार्ट सिटी की श्रेणी में आ जाएगा। इस बात का दुख है कि विकास की रफ्तार यहां धीमी है।
पूरा शहर ही विरासत
सरकार को पुराने शहर को संरक्षित विरासत घोषित करना चाहिए। यहां की हवेलियां, मंदिर, बाजार सभी कुछ बहुत सुन्दर है। इस शहर को दोबारा नए सिरे कैसे विकसित किया जा सकता है, इसका जिम्मा अहमदाबाद के सीईपीटी विश्वविद्यालय को दिया जाना चाहिए। ताकि उसकी टीम बीकानेर को नया रूप दे सके। आज यहां कहने को हैरिटेज रूट है, लेकिन उसकी सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। कोई आना चाहे तो कैसे आए? इसके लिए जरूरी है कि पुराने शहर के वैभव को नए सिरे विकसित किया जाए। एसे प्रयास करें कि इसमें सभी की भागीदारी हो।
शहर से है लगाव
25 साल पहले अपने पुरखों का यह शहर स्वत: कोलकाता से यहां खींच लाया। बस उसके बाद तो
जैसे जाने का मन ही नहीं हुआ। यह शहर दिल में रचता-बसता है। इससे काफी प्रेम है, लगाव है। मन में यह इच्छा भी रहती है कि यह शहर भी महानगरों की भांति आगे बढ़े। यहां की सांस्कृतिक धरोहर, परम्पराएं आज भी कायम हैं। यहां लोगों में प्रेम-भाव है, संतोषी प्रवृत्ति के लोग हैं। यहां के पाटे संवाद का सबसे अहम जरिया है। यहां का खान-पान काफी अच्छा है। देशी हो या विदेशी, सभी पर्यटक खिंचे चले आते हैं। पर्यटन के लिहाज से भी यहां काफी संभावनाएं है।
Updated on:
05 May 2019 11:54 am
Published on:
05 May 2019 11:54 am
