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अब राजस्थान में बनेगा ऊंटनी के दूध का पाउडर, इस बीमारी के मरीजों को देगा गजब के फायदे

Camel Milk Powder: ऊंटनी का दूध अब बच्चों को भी हष्ट-पुष्ट बनाएगा। ब्रांडेड कंपनियों की तर्ज पर बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) ऊंटनी के दूध को पाउडर में बदल कर बच्चों तक इसकी पहुंच सुलभ करेगा। इस परियोजना के लिए केन्द्र में मशीन भी मंगवा ली गई है।

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बृजमोहन आचार्य
Camel Milk Powder: ऊंटनी का दूध अब बच्चों को भी हष्ट-पुष्ट बनाएगा। ब्रांडेड कंपनियों की तर्ज पर बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) ऊंटनी के दूध को पाउडर में बदल कर बच्चों तक इसकी पहुंच सुलभ करेगा। इस परियोजना के लिए केन्द्र में मशीन भी मंगवा ली गई है। निकट भविष्य में इस मशीन से पाउडर दूध का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। पाउडर बनाने के लिए ऊंटनी के दूध की खरीद फिलहाल बाहर से नहीं होगी। केन्द्र में पल रही ऊंटनियों का दूध ही उपयोग में लिया जाएगा। पाउडर बनने के बाद बाजार में उतारने से पहले इसकी दर तय होगी। साथ ही कई परीक्षणों से भी उसे गुजारा जाएगा। उम्मीद है कि कुल्फी, चॉकलेट, आइसक्रीम की तरह ही जल्दी ही ऊंटनी का पाउडर दूध भी घरों के अंदर होगा।

एक लीटर दूध से 900 ग्राम पाउडर
एनआरसीसी में बने पार्लर में ऊंटनी का दूध साठ रुपए प्रति किलोग्राम बिकता है। इस केन्द्र से बाहर के व्यापारी भी दूध की खरीद कर बेचते हैं। मधुमेह एवं टीबी रोगियों के लिए इस दूध का उपयोग किया जाता है। बीकानेर से बाहर ऊंटनी का दूध सौ से ढाई सौ रुपए किलोग्राम तक बिकता है। ऊंटनी के एक लीटर दूध से 900 ग्राम पाउडर बनाया जा सकेगा। पाउडर बनाने के लिए दूध को फ्रिज डायर मशीन में माइनस 50 डिग्री पर रखा जाएगा। इससे दूध में शामिल शुष्क पदार्थ पाउडर के रूप में रह जाएंगे। मशीन में लगे वैक्यूम से दूध में शामिल पानी को सुखा दिया जाएगा। यह मशीन 10 से 40 लीटर दूध से पाउडर बनाने में सक्षम है।

पैकेट खोलने के बाद नहीं होगा खराब
पाउडर के पैकेट को एक बार खोलने के बाद भी यह खराब नहीं होगा। दस ग्राम पाउडर को सौ एमएल पानी में मिलाकर दूध बनाया जा सकेगा। अगर कोई सफर में भी जा रहा है, तो पाउडर के पैकेट साथ लेकर जा सकते हैं। पानी में मिलाकर इसे इंस्टेंट तैयार कर सेवन किया जा सकता है।

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दूध में ये हैं पोषक गुण
-विटामिन बी, सी, कैल्शियम, आयरन, जस्ता, कॉपर और पोटेशियम तत्व

  • दूध से अभी तक मधुमेह एवं क्षय रोगियों पर शोध किया जा चुका है और यह शोध सफल साबित हुआ है। इसमें सीरम प्रोटीन की मात्रा 0.7 से 1.0 प्रतिशत होती है।
  • वैज्ञानिकों ने शोध में यह सिद्ध किया है कि ऊंटनी का दूध मधुमेह, बच्चों में ऑटिज्म, गेस्ट्रो-एंट्रेटाइटिस, उच्च रक्तचाप, कैंसर, हेपेटाइटिस सी एवं बी, ट्यूबरक्लोसिस आदि बीमारियों में लाभकारी साबित हुआ है।सभी के लिए होगा उपयोगी

अब तक ऊंटनी के दूध से कुल्फी, आइसक्रीम, गुलाब जामुन, पेड़े, कॉफी, चाय सहित 25 तरह के उत्पाद बनाए जा चुके हैं। अब पाउडर बनाने के बाद इसका उपयोग सहज रूप से हो सकेगा। इस दूध में औषधीय गुण भरपूर है। यह सभी के लिए उपयोगी होगा।

  • डॉ. आर्त बंधु साहू, निदेशक एनआरसीसी

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पाउडर करेगा बेहतर काम
ऊंटनी का दूध तथा इससे बनने वाला पाउडर मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी है। इसमें 52 यूनिट इंसुलिन होता है। पाउडर के रूप में उत्पाद सामने आएगा, तो हर जगह मिलने लगेगा। पाउडर के पैकेट लाने ले जाने में भी सरलता रहेगी।
डॉ. आरपी अग्रवाल, शोधकर्ता