
शास्त्रीय संगीय संध्या : कणिका पांडे ने बांधा समां
बीकानेर. 'पलकन से मन रिजाऊं...' यमन राग में निबद्ध शास्त्रीय ख्याल के स्वर बुधवार को जब अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायिका कणिका पांडे ने छेड़े तो टीएम ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। मौका था यहां पर विरासत संवर्धन संस्थान और उत्तर-पश्चिम रेलवे मंडल साहित्य संस्कृति एवं ललित कला संस्थान के तत्वावधान में सितार वादक पंडित जसकरण गोस्वामी की स्मृति में हुई शास्त्रीय संगीत संध्या का। कलाकार ने बड़े ख्याल के बाद छोटा ख्याल 'सखी ऐ री आली प्रिया बिना...Ó में गायन को विस्तार दिया।
आकार की लयकारी से श्रोताओं को मंत्रमुग्द कर दिया। पांडे ने गायिकी से अपने घराने की छाप छोड़ी। कार्यक्रम के अंत में पांडे ने 'धन्यवाद सेवा का अवसर पायाÓ भजन की प्रस्तुति दी। करीब डेढ़ घंटे की प्रस्तुति से कलाकार ने शास्त्रीय संगीत की विधाओं से श्रोताओं को सराबोर किया।पांडे के साथ शैलेन्द्र मिश्रा ने तबला संगत एवं राजेन्द्र कुमार बेनर्जी ने हारमोनियम पर संगत दी।
इस मौके पर पश्चिम विधानसभा विधायक डॉ.गोपाल जोशी, मंडल रेल प्रबंधक एके दूबे, टीएम लालानी, मंडल रेल मुख्य कार्मिक अधिकारी हर्षवर्धन नांगल, असित-अमित गोस्वामी, स्पिक मैके के दामोदर तंवर सहित संगीत जगत जुड़े लोग मौजूद रहे।
लिटिल बुद्धा में पाश्र्व गायन : राजन-साजन मिश्रा से संगीत की बारीकियां सीखने वाली कणिका पांडे ने हॉलीबुड फिल्म 'द लिटिल बुद्धाÓ में उस्ताद जाकिर हुसैन और रुइची साकामोटो के संगीत निर्देशन में पाश्र्व गायन किया है। कणिका ने राजस्थान विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक हासिल करने के साथ स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है।
संगीत की कोई सीमा नहीं
शास्त्रीय गायिका कणिका पांडे का कहना है कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत व संस्कृति की छाप विदेशों में भी दिखाई देती है। वर्तमान में अमेरिका में प्रवास कर रही जयपुर मूल की शास्त्रीय गायिक पांडे ने बुधवार को बीकानेर पहुंचने के बाद पत्रिका से बातचीत में कहा कि संगीत तो, संगीत होता है, फिर बात भारतीय शास्त्रीय संगीत की करें, तो इसको सुनने वालों को शुकून महसूस होता है।
इस संगीत में इतनी शक्ति है की सुनने वाला अपने आप बंध जाता है, लेकिन इसके लिए मन में इसके प्रति जिज्ञासा जरूरी है। पांडे ने बताया कि अमेरिका में भी संगीत व संस्कृति के प्रति काफी रुझान है। वहां कई संस्थाएं व सरकारी स्तर पर कलाकारों के संरक्षण के लिए काम होता है।
Published on:
26 Jul 2018 10:06 am
