
date palm in Bikaner
खजूर की नामी किस्मों का बड़ा उत्पादन केन्द्र होगा बीकानेर
हेम शर्मा
बीकानेर. रोग प्रतिरोधक और पौष्टिकता से भरपूर फल खजूर की आने वाले वर्षों में बीकानेर में बहुतायत होगी। बीकानेर खजूर उत्पादन का बड़ा केन्द्र होगा। इसकी आधारभूत तैयारियां कर ली गई हैं। पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके बीकानेर, फलौदी, जैसलमेर और बाड़मेर एशिया में अब भी सबसे ज्यादा खजूर उत्पादक हैं।
गर्मी का मौसम और भूमिगत खारा पानी खजूर उत्पादन के लिए अनुकूल है। यह पारिस्थितिकी पश्चिमी राजस्थान में सहज उपलब्ध है। इन इलाकों में १८ हजार हैक्टेयर में खजूर की खेती की गई है। इन दिनों बीकानेर में कानासर के पास रश्मि फार्म, कृषि विश्वविद्यालय और शुष्क उद्यानिकी संस्थान में खूजर के पेड़ फलों से लदे हुए हैं। रश्मि फार्म में खजूर की बरही, खुनेजी और मेढज़ूल किस्में है। यहां ऊतक संवद्र्धन (टिश्यु कल्चर) तकनीक से पांच वर्ष पहले लगाई ये किस्में फल देने लगी हैं। रश्मि फार्म में बरही व मेढज़ूल किस्म के आठ-आठ सौ पेड़ तथा खुनैजी के सौ पेड़ों पर खजूर पकने को हैं। यह फार्म खजूर उत्पादक किसानों के लिए एक मॉडल है। अभी पांच साल के हर पेड़ पर २५-३० किलो खजूर का उत्पादन हो रहा है। अगले वर्षों में ७० किलो तक प्रति पेड़ उत्पादन का आकलन है।
प्रति बीघा ७५ हजार रु.
रश्मि फार्म के प्रबंधक प्रमोद गोस्वामी का कहना है कि इस फार्म में खुशहाली के पीछे उद्यानिकी वैज्ञानिक अतुल चन्द्रा की समझ और मेहनत है। उन्होंने ऊतक संवद्र्धन से खजूर के पौधे लगाए। एक मीटर के गड्ढे में गोबर की खाद एवं दीमक नाशक दवा का समुचित प्रयोग किया। दो साल तक पौधों को गर्मी से बचाए रखा। इससे पेड़ स्वस्थ और उत्पादक बने हंै। अब इस फार्म में ७५ हजार रुपए प्रति बीघा की आमदनी का आकलन किया जा रहा है।
एंटी ऑक्सीडेंट भी
खूजर के इस खेत में १० प्रतिशत नर पौधे लगे है। नर से परागकण संग्रहित कर मादा के फूलों को निषेचित किया जाता है। इसके बाद ही फल लगते हैं। इससे प्रति बीघा ७५ हजार की आमदनी होती है। खजूर में कार्बोहाइड्रेड, विटामिन, आयरन, एंटी ऑक्सीडेंट के कारण यह कैंसर प्रतिरोधक माना जाता है। एक पौधे में ७० से ८० किलो खजूर का उत्पादन होता है।
व्यापक संभावना
बीकानेर तथा पश्चिमी राजस्थान में खजूर की खेती की व्यापक संभावना है। इलाके में खजूर की खेती शुरू हो गई है। गर्म मौसम और खारा पानी खजूर की खेती के लिए अनुकूल वातावरण है। इस इलाके में हलावी, खतरावी सामरान, बरही, खुनेजी, मेढजूल किस्में उगाई गई हैं। किसानों का रुझान खजूर की खेती की तरफ बढ़ रहा है।
डॉ. इन्द्र मोहन, उद्यानिकी वैज्ञानिक, एसकेआरयू बीकानेर
Published on:
22 Jun 2018 11:09 am
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