2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यहां सर्द मौसम में खुले में बसों की राह देखना यात्रियों की विवशता

वन विभाग की जमीन पर बस स्टैंड बनाने की मांग

2 min read
Google source verification
यहां सर्द मौसम में खुले में बसों की राह देखना यात्रियों की विवशता

यहां सर्द मौसम में खुले में बसों की राह देखना यात्रियों की विवशता

संजय पारीक
श्रीडूंगरगढ़. सर्द हवा चल रही हो या फिर घना कोहरा छाया हो, चाहे तेज धूप हो या बारिश का मौसम। यदि श्रीडूंगरगढ़ से किसी भी गंतव्य स्थान के लिए जाना है तो मौसम की परवाह किए बिना खुले आसमान के नीचे बस का इंतजार करना पड़ेगा। महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद मे लिए व बुजुर्ग अपनी लाठी के सहारे खड़े बस का इंतजार करते नजर आने का दृश्य यहां पर आम बात है। इसे विंडबना ही कहेंगे कि 98 गांवों का तहसील मुख्यालय व जयपुर, दिल्ली सहित कई शहरों का मुख्य मार्ग होने के बाद भी कस्बे में ना तो स्थायी बस स्टैंड है और ना ही यहां आवागमन करने वाले यात्रियों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था है। यात्रियों को घूमचक्कर पर सड़क के किनारे खड़े रहकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।

सीएम को बताई समस्या
कस्बे के बीचोंबीच महावीर कीर्ति स्तम्भ घूमचक्कर के पास स्थित वन विभाग की जमीन पर बस स्टैंड बनाने की मांग को लेकर पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता तुलसीराम चोरड़िया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र भेजा है। चोरड़िया ने बताया कि कस्बे में 20 वर्ष पूर्व सरदारशहर रोड पर परिवहन निगम का बस स्टैंड बनाया गया था, जो अब जर्जर व क्षतिग्रस्त हो चुका है। साथ ही शहर से दूर होने के चलते यात्री इस बस स्टैंड पर जाने में रूचि नहीं दिखाते हैं। नए बस स्टैंड के लिए कस्बे के बीचोंबीच महावीर कीर्ति स्तम्भ राष्ट्रीय राजमार्ग-11 के दक्षिण भाग में वन विभाग की खाली जमीन है, जो वर्तमान में किसी काम मेें भी नहीं आ रही है। कस्बे में प्रतिदिन सैंकड़ो बसों का आवागमन होता है तथा वन विभाग की जमीन के पास ही अस्थायी बस स्टैंड बना है, लेकिन यहां पर यात्रियों के लिए कोई सुविधा नही होने से परेशान होते हैं।

गौरतलब है कि वन विभाग की जमीन पर दूरभाष विनिमय केंद्र भी बना है तथा वन विभाग की इस जमीन का नाम जीएलआई एरिया है। इस जमीन पर उपजाऊ पेड़ पौधे भी नही है और कस्बे के नजदीक होने के कारण अतिक्रमण की भी आशंका बनी है। ऐसे में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर उक्त भूमि पर बस स्टैंड बनाने के लिए आवंटन प्रक्रिया शुरू की जाए। ताकि क्षेत्रवासियों को सुविधा मिल सके। पत्र पर साहित्यकार श्याम महर्षि, व्यापार मंडल अध्यक्ष श्यामसुंदर पारीक, भंवर भोजक, रामचन्द्र राठी, विमल भाटी, जगदीश प्रसाद स्वामी, करणीसिंह बाना, भरतसिंह राठौड़, विजयराज सेठिया, हीरालाल पुगलिया व श्रीगोपाल राठी ने हस्ताक्षर किए।

घूमचक्कर के पास ही बस स्टैंड आवश्यक
कस्बे के घूमचक्कर से ही जयपुर, दिल्ली, बीकानेर, लूणकरनसर, बीदासर, सरदारशहर व रतनगढ़ के लिए सड़क मार्ग निकलने के कारण बसों का आवागमन यहीं से रहता है। रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार, कृषि मण्डी व सरकारी कार्यालय आदि भी यहां से नजदीक हैं। इन सभी कारणों के चलते घूमचक्कर लोगों के लिए सुगम बना है, लेकिन स्थायी बस स्टैंड नहीं होने से बैठने एवं सिर छुपाने की जगह की कमी के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जगह के अभाव में बसों का ठहराव तीन अलग-अलग स्थलों पर होता है। यात्रियों की सुविधा के लिए कस्बेवासी घूमचक्कर पर बस स्टैंड बनाने की मांग लगातार करते आ रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी है। यहां बस स्टैंड का मुद्दा चुनावों के दौरान भी उठता रहा है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता व इच्छा शक्ति के अभाव में पिछले बीस साल से यात्री इस समस्या का दंश झेल रहे हैं।