
साढ़े सात साल से ड्रग लैबोरेट्री खुलने का इंतजार
बीकानेर। दवाओं की जांच के लिए बीकानेर से भेजे जाने वाले सैम्पलों की रिपोर्ट दो से तीन महीने में मिल रही है। इसकी वजह है कि औषधि नयंत्रण संगठन की राजस्थान में केवल एक मात्र प्रयोगशाला जयपुर में है।
बीकानेर में संभागस्तरीय ड्रग लैबोरेट्री खोलने के लिए पटेलनगर में करोड़ों रुपए की लागत से बनी इमारत साढ़े सात सालों से उपयोग में नहीं आ रही। बीकानेर में दवाइयों का बड़ा कारोबार है। इसकी आड में ड्रग माफिया भी अवैध गतिविधियों का संचालन करते हैं। यही कारण है कि औषधि नियंत्रण संगठन यहां कई बार नकली दवाओं का जब्त कर चुका है। दूसरी तरह यहां से जांच के लिए जयपुर भेजे गए दवाओं के सैम्पलों की जांच आने में तीन से छह माह का समय तक लग जाता है। हालत यह है कि बुखार, कैंसर व एंटीबायोटिक समेत कई जीवनरक्षक दवाइयों के सैम्पल की जांच जयपुर ड्रग लैबोरेट्री में पेंडिंग है।
नौ माह पहले आए थे उपकरण
बीकानेर में संभाग स्तर की ड्रग लैबोरेट्री शुरू करने के लिए करीब नौ माह पहले एक करोड़ से अधिक के उपकरण खरीद किए गए है। यह उपकरण उपयोग नहीं होने से पटेलनगर स्थित ड्रग लैबोरेट्री में धूल फांक रहे हैं। लैब में एचपीटीएलसी, डिजोयूशन सहित कई उपकरण शामिल है। उपकरणों से सुसज्जित लैब को चालू करने की दिशा में राज्य सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है।
घोषणा हुई लेकिन चालू नहीं
वर्ष २०१२-१३ में राज्य सरकार ने प्रदेश के बीकानेर, जोधपुर एवं उदयपुर में ड्रग लैबोरेट्री खोलने की घोषणा की ताकि इन तीनों संभाग की दवाओं की जांच यहां की जा सके। इससे जयपुर में काम का बोझ कम होगा। अफसोस करीब साढ़े सात साल गुजरने के बावजूद अभी तक लैबोरेट्री शुरू नहीं हो सकी है।
जल्द होगी शुरू
ड्रग लैबोरेट्री के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए के उपकरण खरीद किए हैं। अब लैब को शुरू करने की तैयारियां चल रही थी कि कोरोना के चलते एकबारगी प्रक्रिया फिर ठप हो गई। सरकार प्रदेश की तीन संभागों में लैब जल्द शुरू करने के प्रयास में हैं।
सुभाष मुटनेजा, सहायक औषधि नियंत्रक बीकानेर
Published on:
09 May 2020 06:30 am
