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कभी रियासत की शान रही लिफ्ट अब ताले में कैद

बीकानेर में रियासतकाल में एेसी ही एक धरोहर सारसंभाल के अभाव में अपनी उपयोगिता खो रही है।

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लिफ्ट

निखिल स्वामी/बीकानेर. भले ही रियासतकाल की वस्तुएं व इतिहास स्वर्णिम रहे हो। मगर बीकानेर में रियासतकाल में एेसी ही एक धरोहर सारसंभाल के अभाव में अपनी उपयोगिता खो रही है। यहां डॉ. करणीसिंह स्टेडियम में रियासतकाल में लगाई गई लिफ्ट नकारा पड़ी है। इस लिफ्ट का उपयोग कभी राजा और उनकी रानियां करती थी।

प्रदेश में एकमात्र बीकानेर के डॉ.करणीसिंह स्टेडियम में एेसी रियासतकाल की लिफ्ट लगी हुई है। महाराजा गंगासिंह ने 1937 में स्टेडियम निर्माण के दौरान लिफ्ट को लगवाया था। स्टेडियम का दो मंजिला भवन भी रियासतकालीन भवन निर्माण कला का नमूना है। इस हैरिटेज बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में बनी दर्शक दीर्घा में जाने के लिए लिफ्ट का उपयोग किया जाता था।

सुरक्षा के लिहाज से
लिफ्ट को लगाने का उद्देश्य राजा-महाराजा को ऊपर बने उस हॉल में पहुंचाना था जहां बैठकर वह मैदान में होने वाले फुटबॉल मैच का आनंद लेते थे। राजा और रानियों की सवारी या गाड़ी आकर रूकती थी। वहां से लिफ्ट में चढ़कर वे ऊपर पहुंच जाते थे। जानकार लोगों का मानना है कि इस लिफ्ट का सुरक्षा के लिहाज से भी उपयोग किया जाता था।

सीधे गैरेज में गाड़ी
डॉ.करणीसिंह स्टेडियम में राजा-महाराजा मैच देखने के लिए उनके गाड़ी सीधे गैरेज में जाती और वहां से राजा-महाराजा लिफ्ट के माध्यम से ऊपर बैठकर मैच का लुत्फ उठाते थे।

लिफ्ट में लगी है पुरानी मशीनें
लिफ्ट में पुरानी मशीनें लगी हुई है। करीब 30 साल पहले तक लिफ्ट का उपयोग किया जाता था। इसके बाद खराब होने पर किसी ने मरम्मत नहीं कराई। अब इसके ताला लगाकर छोड़ा हुआ है। जिसे कई साल से किसी ने खोलकर तक नहीं देखा।

इनका कहना है
क्रीड़ा परिषद् की मीटिंग में लिफ्ट का मुद्दा उठाया जाएगा। साथ ही इस लिफ्ट को देखकर इसको चालू करवाने के प्रयास करवाए जाएंगे। इसके लिए विधायक व सांसद से बातचीत करेंगे।
हरिराम चौधरी, जिला खेल अधिकारी, बीकानेर