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री-लोकेशन से आशा सुपरवाइजर की घर वापसी, निदेशक ने जारी किए आदेश

राज्य सरकार संविदा पीएचसी आशा सुपरवाइजरों को री-लोकेशन पॉलिसी के तहत इधर-उधर किया है।

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good news for Asha supervisor

एनआरएचएम कर्मचारियों के आंदोलन ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर लगे संविदा आशा सुपरवाइजरों की वर्षों की आस पूरी कर दी है। यह उन सभी संविदा कर्मचारियों के लिए खुश खबर है, जो अल्पवेतन भोगी होने के साथ घर-परिवार से दूर हैं।

राज्य सरकार संविदा पीएचसी आशा सुपरवाइजरों को री-लोकेशन पॉलिसी के तहत इधर-उधर किया है। इस फेरबदल में प्रदेशभर के 51 संविदा कार्मिकों को फायदा होगा। यह आदेश शुक्रवार शाम को एनआरएचएम निदेशक एवं चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के शासन सचिव नवीन जैन ने जारी किए।

आदेश के अनुसार 51 संविदा कार्मिकों की जगह नवचयनित संविदा कार्मिकों को पदस्थापित किया जाएगा। प्रदेश के सभी सीएमएचओ को निर्देश दिए गए हैं कि उनके अधीनस्थ कार्यरत री-लोकेशन किए संविदा कार्मिकों को तब तक कार्यमुक्त नहीं करें, जब तक नवचयनित संविदाकर्मी पदस्थापित न हो जाएं।

समझ से परे यह रणनीति
एनआरएचएम कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार की यह रणनीति समझ से परे हैं। सरकार कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की बजाय उन्हें तोडऩे का काम कर रही है। सामूहिक अवकाश में शामिल संविदा पीएचसी आशा सुपरवाइजरों को री-लोकेशन के नाम पर उन्हें घर के नजदीक पदस्थापित कर वापस काम पर बुला रही है। उनका कहना है कि सरकार ने दस वर्षों से लंबित री-लोकेशन पॉलिसी को एनआरएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान ही कैसे लागू किया। उसे अब ही अल्पवेतन भोगी कर्मचारियों की तकलीफ कैसे महसूस हुई।

बदली है लोकेशन
री-लोकेशन पॉलिसी पिछले दस वर्ष से लंबित थी, जिसे अब लागू कर रहे हैं। इस पॉलिसी से अल्पवेतन भोगी कर्मचारियों को घर के नजदीक भेज कर राहत दी है। एनआरएचएम कर्मचारियों का सामूहिक अवकाश का मुद्दा अलग है। री-लोकेशन को उससे जोड़कर देखना उचित नहीं है।
नवीन जैन, निदेशक, एनआरएचएम

हर स्तर पर लड़ाई

सरकार आंदोलन को कमजोर करने में लगी है। री-लोकेशन पॉलिसी के जरिए कई कर्मचारियों को काम पर बुलाने का प्रयास कर रही है। अपनी मांगों के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।
नवल किशोर आचार्य, प्रदेश कोषाध्यक्ष, एनआरएचएम

थालियां बजाकर उड़ाई सरकार की नींद
सामूहिक अवकाश के 12 वें दिन शुक्रवार को एनआरएचएम कर्मचारियों ने थाली और पीपे बजाकर सरकार को जगाने का प्रयास किया। धरनास्थल पर पूर्व विधायक वीरेन्द्र बेनीवाल, पूर्व विधायक गोविंदराम मेघवाल, पूर्व मंत्री बुलाकीदास कल्ला, शहर कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल गहलोत, इंटक नेता रमेश व्यास एवं समाजसेवी पूनम व्यास ने समर्थन जताया। किशोर व्यास कहा कि सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन को महत्व नहीं दे रही है। अब उग्र आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। धरने को सीपी व्यास, दिलीप बिस्सा, मधुसूदन व्यास, हेतराम बेनीवाल आदि ने संबोधित किया।