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जिले में आखिरी बार वर्ष 2012 में दिखा था यह राज्य पक्षी

वर्ष 2008 में पूरे राजस्थान में बीकानेर व जैसलमेर में यह गोडावण सबसे ज्यादा दिखाई देता था, अब बीकानेर जिले में एक भी गोडावण नहीं है।

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Great Indian Bustard

राजस्थान का राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) का बीकानेर जिले में अस्तित्व खत्म हो गया है। एेसी स्थिति में राजस्थान से भी गोडावण लुप्त होने की कगार पर हैं। वर्ष 2008 में पूरे राजस्थान में बीकानेर व जैसलमेर में यह गोडावण सबसे ज्यादा दिखाई देता था, अब बीकानेर जिले में एक भी गोडावण नहीं है।

प्रदेश में सिर्फ 45 से 50 ही गोडावण रह गए हैं। गोडावण पक्षी की संख्या में पिछले डेढ़ दशक से लगातार कमी आई है। अब गोडावण पूरे राजस्थान में सिर्फ बाड़मेर, जैसलमेर जिले में पाए जाते हैं। गोडावण बीकानेर जिले में आखिरी बार वर्ष 2012 में दियातरा व गजनेर में दिखाई दिया था।

गोडावण बीकानेर के गजनेर, दियातरा, कोडमदेसर, बज्जू और गुजरात, महाराष्ट्र आदि जगह पाया जाता है। इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर की लुप्त होने वाली प्रजाति में गोडावण शामिल है, जो पूरे विश्व में सिर्फ उत्तर भारत में पाई जाती है। बाड़मेर और जैसलमेर के तीन हजार 162 वर्ग किलोमीटर में ही गोडावण बचे हैं।

आवास सुरक्षित नहीं
गोडावण को ब्रिडिंग के लिए शांतिपूर्ण आवास की जरूरत होती है, लेकिन अब मानवीय दखल ज्यादा होने से इनके आवास सुरक्षित नहीं है। यहां भोजन भी मुहैया नहीं है। आजकल ग्रासलेंड खत्म हो गई है। खेती होने से भोजन खत्म हो गया। यह झाडि़यां, अनाज के दाने, बेर आदि खाते हैं।

पाकिस्तान में होता है शिकार
गोडावण भारत की सीमा से पाकिस्तान में चले जाते हैं। पाकिस्तान के भावलपुर, रहीमयार खान में इनका शिकार सबसे ज्यादा होता है। भारत में गोडावण का शिकार नहीं होता है। पाकिस्तान में हर साल दर्जनों गोडावण मारे जाते हैं। अब तक करीब 50 गोडावण मारे गए हैं।

हाईटेंशन लाइन से मौत
गोडावण की मौत बिजली की हाईटेंशन लाइन के तार की चपेट में आने से भी हुई है। अब तक तीन गोडावण की हाईटेंशन लाइन से मौत हो चुकी है।

ज्यादा शोध व प्रजनन केन्द्र जरूरी
पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि गोडावण के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है। साथ ही प्रजनन केन्द्र के माध्यम से भी गोडावण को सुरक्षित किया जा सकता है। वर्तमान में राज्य सरकार व वन विभाग बर्ड कन्वर्टर (तारों पर लगाया जाने वाला उपकरण) लगाने का विचार कर रही है।

हो चुका लुप्त
बीकानेर जिले में गोडावण मैंने तो कभी देखा नहीं है। इसको अंतिम बार दियातरा में देखा गया है। बीकानेर में यह लुप्त हो चुका है।
रामनिवास कुमावत, उपवन संरक्षक (वन्यजीव), बीकानेर

मैनेजमेंट जरूरी

इसका मैनेजमेंट होना जरूरी है। इसकी फीडिंग पर इकोलॉजी के अनुरूप काम होना चाहिए। प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ तो लुप्त हो जाएंगे।
डॉ. अनिलकुमार छंगाणी, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण व विज्ञान विभाग (एमजीएसयू बीकानेर)

प्रदेश में गोडावण
वर्ष संख्या
2010 45
2011 52
2012 60
2013 44
2014 40
2015 44