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हास्य-व्यंग्य नाटक चार कोट ने की व्यवस्था पर चोट

हास्य व व्यंग्य के तड़के ने जहां दर्शकों का मनोरंजन किया, वहीं व्यवस्था में विसंगतियों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।

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राजस्थान शाकद्वीपीय ब्राह्मण विकास समिति के तत्वावधान में अनुराग कला केन्द्र की ओर से रविवार को रवीन्द्र रंगमंच पर नाटक 'चार कोट' का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से वर्तमान में व्यवस्था और हालात पर चोट की गई। हास्य व व्यंग्य के तड़के ने जहां दर्शकों का मनोरंजन किया, वहीं व्यवस्था में विसंगतियों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।

नाटक के माध्यम से आज के हालात में सरकार, कानून एवं राजनीति में व्याप्त खामियों के प्रति आमजन के दर्द को दमदार अभिनय के साथ मंच पर उजागर किया गया। चार कोट एक तरह से जनता की सेवा अथवा सुरक्षा का प्रतीक है, लेकिन वास्तव में आम आदमी उनसे सहमा हुआ है। उनसे बचने का प्रयास भी करता है।

तंत्र की व्यवस्था में भटकता आम आदमी राजनीति की चक्की में किस तरह से पिसता जा रहा है, उसकी पीड़ा और भावनाओं को एक सीढ़ी की तरह कैसे इस्तेमाल किया जाता है, इन सभी पहलुओं को किरादारों के माध्यम से चुटीले अंदाज में मंच पर साकार किया गया। सधे हुए निर्देशन और दमदार प्रस्तुति के दम पर नाटक ने दर्शकों से जमकर दाद बटौरी।

आयोजन को लेकर शंकर सेवग, शिवरतन, ऋतु शर्मा, ज्ञानवती शर्मा सक्रिय रहे। इस मौके पर समिति की ओर से आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरित किए गए।

इन्होंने निभाई भूमिका
समिति की ओर से बुधवार को सूर्य सप्तमी मनाई जाएगी। इसके उपलक्ष्य में रविवार को नाटक चार कोट का मंचन किया गया था। दिवंगत एवी कमल के लिखे नाटक का निर्देशन सुधेश व्यास ने किया। सह निर्देशक विकास शर्मा थे। संगीत हिमांशु व्यास ने दिया। इसमें अशोक व्यास, नवल किशोर, किशन रंगा, उत्तम, सुनील जोशी, रिया मोटवानी, जीतेन्द, सुरेन्द्र, विकास, सुमित, शिव आदि ने अभिनय किया।

जैन संस्कार विधि से मनाया जन्मोत्सव
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान में रविवार को गंगाशहर स्थित तेरापंथ भवन में जैन संस्कार विधि से सामूहिक जन्मदिन संस्कार का आयोजन किया गया। अध्यक्ष आसकरण बोथरा ने बताया कि जनवरी माह में आने वाले जन्मदिवस को एक साथ एक जगह पर जैन संस्कार विधि से मंत्रोच्चारण व हर्षोल्लास के साथ मनाया।

जैन संस्कारक रतन छल्लाणी और पवन छाजेड़ ने मंत्रोच्चार से कार्यक्रम शुरू किया। जैन संस्कारक रतन छल्लाणी ने कहा कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण मांगलिक कार्यक्रमों को जैन संस्कार विधि के द्वारा आयोजित करवाने का दृढ़ संकल्प लें तथा सभी को प्रेरित करें। कार्यक्रम में आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के महामंत्री जतनलाल दुगड़,

तेरापंथी सभा के कोषाध्यक्ष भैंरूदान सेठिया, अभातेयुप के कार्यसमिति सदस्य मनीष बाफना, महिला मण्डल की सुमन छाजेड़, बिन्दू छाजेड़, किशोर मण्डल संयोजक कौशल मालू आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में मुनि शांतिकुमार ने सभी को मंगलपाठ सुनाया।