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बीकानेर. जोड़बीड क्षेत्र में बाज, गिद्ध व अन्य पक्षियों के लिए बिजली की हाईटेंशन लाइनें खतरा बन रही हैं। करंट की चपेट में आने से पक्षी मारे जा रहे हैं। खासकर रेंगने वाले वन्यजीवों का शिकार करने वाले व्हाइट आइड (सफेद आंख) बजर्ड व लिंगर फाल्कन (बाज की प्रजाति) करंट के कारण काल का ग्रास बन रहे हैं। जोड़बीड़ में पिछले दो माह में करीब एक दर्जन बाजों की मौत हो गई। देशी-विदेशी पक्षियों के मरने से वन विभाग भी चिन्तित है।
करंट से पक्षियों को बचाने के लिए वन विभाग ने जोधपुर विद्युत वितरण निगम के मुख्य संभागीय अभियंता को पत्र लिखा है। जोडबीड में कोटड़ी से सुरधना गांव की ओर जाने वाले रास्ते में बिजली लाइनें व खंभे हैं। ये पक्षी अपने शिकार को गिरफ्त में लेने के बाद इन तारों और खंभों पर बैठ जाते हैं और तभी करंट की चपेट में आ जाते हैं।
अगस्त में आधा दर्जन की मौत वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले महीने आधा दर्जन वाइट आइड बजर्ड (बाज) की मौत करंट से लगने से हो गई। इसी तरह जुलाई में लिंगर फाल्कन प्रजाति के चार बाजों की मौत करंट से हो गई थी। इन पक्षियों को उस समय करंट लगा, जब वे सांप, सांडा आदि वन्यजीवों को शिकार के लिए तारों व खंभों पर ले गए। इसके अलावा कई बार विदेशी गिद्ध व अन्य छोटे पक्षी भी करंट की चपेट में आ जाते हैं।
अक्टूबर से सीजन
जोड़बीड़ क्षेत्र में अक्टूबर से विदेशी प्रवासी पक्षियों के आने का सीजन शुरू हो जाएगा। ये पक्षी मार्च तक बीकानेर में ही रहते हैं। हलांकि कुछ देशी-विदेशी बाज, गिद्ध व अन्य पक्षी यहां सालभर आते-जाते रहते हैं। तापमान कम होने के साथ ही इनकी संख्या में इजाफा हो जाएगा।
कवर किए जाएं तार
वन विभाग के उप वन संरक्षक (वन्यजीव) जयदीप सिंह राठौड़ ने बताया कि मुख्य संभागीय अभियंता को पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि कोटड़ी से सुरधना की ओर जा रही विद्युत लाइनों को इंस्यूलेटेड किया जाए। खंभों पर नंगे तारों को कवर और तारों की दूरी को कम किया जाए।
Published on:
10 Sept 2018 08:16 am
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