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जोड़बीड़ बनेगा पर्यटन स्थल, वन व पर्यटन विभाग मिलकर करेंगे प्रयास

बीकानेर. जोड़बीड क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नए सिरे से कवायद की जा रही है। इसके लिए वन व पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से जल्द ही प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेजेंगे। जोड़बीड में सौ से अधिक प्रजातियों के देशी-विदेशी पक्षियों का जमावड़ा रहता है। बड़ी संख्या में गिद्ध भी आते हैं। ऐसे में वन्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की जोड़बीड क्षेत्र को विकसित करने की मंशा है।

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jodh Beed tourist spot

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बीकानेर. जोड़बीड क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नए सिरे से कवायद की जा रही है। इसके लिए वन व पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से जल्द ही प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेजेंगे। जोड़बीड में सौ से अधिक प्रजातियों के देशी-विदेशी पक्षियों का जमावड़ा रहता है। बड़ी संख्या में गिद्ध भी आते हैं। ऐसे में वन्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की जोड़बीड क्षेत्र को विकसित करने की मंशा है।

उप वन संरक्षक बीकानेर (वन्यजीव) कार्यालय में इसको लेकर शुक्रवार को मंथन किया गया। इसमें पर्यटन अधिकारी पुष्पेन्द्र ङ्क्षसह ने सुझाव रखे। वहीं उप वन संरक्षक जयदीप सिंह राठौड़ ने सुझाव के साथ योजना बताई। दोनों विभागों के अधिकारियों ने पहले चरण पर विचार-विमर्श किया गया। आने वाले दिनों में जल्द ही साझा तौर पर प्रस्ताव बनाए जाएंगे। खासतौर पर पर्यटन विभाग के सहयोग से जोड़बीड़ क्षेत्र का प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को रिझाया जा सके।

56 वर्ग किमी में फैला है क्षेत्र
जोडबीड कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में हर साल विभिन्न प्रजातियों के करीब पांच हजार गिद्ध आते हैं। इसी तरह सौ से अधिक प्रजातियों के हजारों विदेशी पक्षी भी जोड़बीड़ आते है। ये सर्दी के मौसम में आते हैं, मार्च के बाद यहां से रवाना हैं। इनके अलावा चिंकारा, रेगिस्तानी बिल्ली, जंगली सूअर, पाटागोह, अलग-अलग प्रजातियों के सांप आदि जीव-जन्तु जोड़बीड़ में घूमते रहते हैं। यह क्षेत्र ५६ वर्ग किमी में फैला हुआ है।

लेंगे सहयोग
'जोड़बीड में वन्य पर्यटन की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके लिए जल्द ही प्रस्ताव बनाएंगे। इस कार्य में पर्यटन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।
जयदीप सिंह राठौड़, उपवन संरक्षक (वन्यजीव)

बाढ़ पीडि़तों के लिए पूर्व राजमाता ने दिए पांच लाख रुपए
बीकानेर. केरल में बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए शुक्रवार को जूनागढ़ महाराजा रायसिंह ट्रस्ट आगे आया। ट्रस्ट की चेयरपर्सन पूर्व राजमाता सुशीला कुमारी ने केरल में आई आपदा से पीडि़त लोगों के लिए पांच लाख रुपए की सहायता राशि दी है। जूनागढ़ के व्यवस्थापक कर्नल देवनाथ सिंह ने बताया कि सहायता राशि केरल के मुख्यमंत्री डिस्ट्रेस रिलीफ फंड में भेजी गई है तथा एसबीआइ सिटी तिरुवनंतपुरम में खाते में जमा करवा दी गई है। उन्होंने बताया कि केरल में प्राकृतिक आपदा के बाद पूर्व राजमाता सुशीला कुमारी ने पीडि़तों के लिए सहायता राशि देने के निर्देश दिए थे। सिंह ने बताया कि जूनागढ़ महाराजा रायङ्क्षसह ट्रस्ट हर साल करीब पचास लाख रुपए की सहायता राशि गरीब परिवार, कैंसर पीडि़तों, विधवा महिलाओं के बच्चों की परवरिश, पढ़ाई सहित पीबीएम अस्पतालों के मरीजों को उपलब्ध करवाई जाती है। बेसहारा पशुओं के उपचार को लेकर भी ट्रस्ट ने पिछले वर्षों में वेटरनरी अस्पताल को सहायता राशि मुहैया करवाई थी।

कलक्टर को सौंपा ६१ हजार का चेक
सेठ तोलाराम बाफना एकेडमी ने भी केरल आपदा से पीडि़त लोगों की सहायता के लिए शुक्रवार को करीब ६१ हजार रुपए का चेक जिला कलक्टर डॉ. नरेन्द्र कुमार गुप्ता को सौंपा। स्कूल के सीईओ डॉ. पीएस वोहरा ने बताया कि केरल में प्राकृतिक आपदा के चलते १२ जिले प्रभावित हैं। शाला परिवार की ओर से सहायता राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा करवाने के लिए जिला कलक्टर को चेक सौंपा है। उन्होंने बताया कि सेठ तोलाराम बाफना ट्रस्ट शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभाता आया है।