मधुमिता रे के शास्त्रीय गायन ने किया मंत्रमुग्ध, देखिये वीडियो

dinesh swami | Publish: Sep, 16 2018 10:30:28 AM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 10:30:29 AM (IST) Bikaner, Rajasthan, India

'गरज-गरज बरसे बादलवा, बिजली चमकेÓ जैसे ख्याल से अन्तरराष्ट्रीय शास्त्रीय गायिका मधुमति रे ने बीकानेर में जब राग मियां मल्हार के स्वर छेड़े तो सादुलगंज स्थित ऐल्केमी संस्थान परिसर में बैठे श्रोता स्वरों के सागर में झूम उठे।

बीकानेर. 'गरज-गरज बरसे बादलवा, बिजली चमकेÓ जैसे ख्याल से अन्तरराष्ट्रीय शास्त्रीय गायिका मधुमति रे ने शनिवार को बीकानेर में जब राग मियां मल्हार के स्वर छेड़े तो सादुलगंज स्थित ऐल्केमी संस्थान परिसर में बैठे श्रोता स्वरों के सागर में झूम उठे। मौका था स्पिक मैके की विरासत शृंखला की दूसरी कड़ी के तहत हुए शास्त्रीय गायन का। मधुमिता रे ने ठुमरी 'धीरे-धीरे झुलाओ, सुकुमारी सिया हो, झूले सरयू के तीरÓ की प्रस्तुति से ठेठ अवध की आभा को स्वरों से साकार कर दिया।

 

कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट के छात्र-छात्राओं की भागीदारी रही। रे ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को भी शांत किया। उनके साथ तबले पर उत्पल घोष व सारंगी पर भरत भूषण गोस्वामी ने संगत की। इस मौके पर मंडल रेल प्रबंधक अनिल दुबे, प्रो. एचपी व्यास, उष्ट्र अनुसंधान के निदेशक एनवी पाटिल, अनिल धिंवा, कन्हैयालाल कच्छावा, मूलाराम चौधरी, लोकेश कच्छावा सहित गणमान्य लोगों ने शिरकत की। स्पिक मैके के राज्य सचिव दामोदर तंवर ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी।

 

शास्त्रीय संगीत के लिए धैर्य जरूरी : मधुमिता रे
मधुमिता रे ने कहा है कि शास्त्रीय संगीत में महारथ हासिल करने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं है। इसके लिए धैर्य, ईमानदारी, लग्न, दृढ़ता की जरूरत होती है। मधुमिता रे ने 'राजस्थान पत्रिकाÓ से बातचीत में कहा कि आज हर कलाकार जल्दबाजी में है, बस तुरंत मंच मिल जाए, फटाफट प्रस्तुति दें और आगे बढ़ें। शास्त्रीय संगीत की साधना में ऐसा संभव नहीं है। यह तो ईश्वर की आराधना के समान है। खासकर नई पीढ़ी को जीवन में पहली सीढ़ी से आखिरी सीढ़ी तक ईमानदारी, सच्चाई के साथ मेहनत करनी चाहिए।

 

 

अच्छे लोगों से तालीम लें। शास्त्रीय संगीत में आज भी गुरु-शिष्य परम्परा कायम है। यह विद्या आमने-सामने बैठकर ही हासिल की जा सकती है। मधुमिता रे ने कहा कि रियलिटी शो से युवाओं की सोच बदल रही है। ग्वालियर घराने से ताल्लुख रखने वाली मधुमिता रे भारत के साथ ही पेरिस, लंदन, कनाड़ा, टोरंटो सहित विश्व के कई दशों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।

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