
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने जानी प्रवासी पक्षियों की गतिविधियां
बीकानेर. महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों ने गुरुवार को जोडबीड़़ कंजर्वेशन रिजर्व का भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने वहां वन्यजीवों, सरिसृप, स्थानीय व प्रवासी पक्षियों के बारे में जानकारी ली। विद्यार्थी व व्याख्याताओं ने भ्रमण के दौरान लगभग 650 से 700 प्रवासी गिद्ध व लगभग एक हजार स्थानीय प्रजातियों के गिद्ध देखे। साथ ही 600 से 700 ईगल्स और शिकारी प्रवासी पक्षियों की गतिविधियां देखी।विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार छंगाणी ने जोडबीड़ रिजर्व मे पाए जाने वाले जीव-जन्तुओं व पक्षियों के बारे में बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को जोडबीड़ की वनस्पति, उनकी उपयोगिता, उनके अनूकुलन व थार की परिस्थितिकी को बताते हुए वन्यजीव संरक्षण की आवश्यकता जताई। साथ ही जोडबीड़ के प्रबंधन में स्थानीय लोगों की भूमिका के बारे में भी बताया।
सात प्रजातियों के गिद्ध
सात प्रजातियों के गिद्ध जोडबीड़ व बीकानेर के आसपास मरुस्थलीय भूभागों में पाए जाते है। इनमें किंग वल्चर (सार्कोजिप्स काल्वस), लोंग बिल्ड वल्चर (जिप्स इण्डिकस), व्हाइट बैक्ड वल्चर (जिप्स बेंगालेन्सिस) और इजिप्शियन वल्चर (नियोफ्रोन पर्सनोप्टेरस) स्थानीय प्रजाती के गिद्ध हैं तथा सिनेरियस वल्चर (ऐजिपियस मोनोकस), यूरेसियन ग्रिफ ान वल्चर (जिप्स फ्लवस) और हिमालयन ग्रिफान वल्चर (जिप्स हिमालयनसिस) प्रवासी गिद्धों की प्रजातियां हैं। ये शीत प्रवास के दौरान जोडबीड़़ के विभिन्न इलाकों में आते हैं।
रोजी स्टार्लिंग सबसे पहले आए
जोडबीड़़ में इस बार सबसे पहले प्रवासी पक्षी रोजी स्टार्लिंग आए, जो अगस्त में ही बीकानेर शहर के विभिन्न क्षेत्रों मे देखे गए। इसके बाद यूरोपियन रोलर, लेसर केस्ट्रल, बुशलार्क, इम्पीरियल, मोन्टेगु हेरियर, कुरजां, लेगर फ ॉल्कन, ईगल, स्टेपी ईगल, यूरेशियन ग्रिफ ान, हिमालयन ग्रिफ ान व सिनेरियस वल्चर आए।
Published on:
14 Dec 2018 12:02 pm
