
बीकानेर. श्रीगंगानगर में तापक्रम मच्छरों के लार्वा पनपने के लिए अनुकूल है। यहां एनाफिलीज मच्छर की पांच प्रजातियां हैं। श्रीगंगानगर में पानी की पीएच (अम्लीयता एवं क्षारियता) ६.६ से ७.९ के बीच पाई गई। सामान्यतया ६.८ से ७.२ के बीच पीएच मच्छरो के अंड़ों को पतला करने में सहायक साबित होती है, जिससे लार्वा की प्रथम अवस्था बनती हैं। ये तथ्य हाल ही श्रीगंगानगर में किए गए शोध में उजगार हुए हैं।
यह शोध श्रीगंगानगर की सुमन सहारण ने डूंगर कॉलेज के प्राणीशास्त्र के सहआचार्य डॉ. कैलाश कुमार स्वामी ने निर्देशन में किया। शोध में श्रीगंगानगर के शहरी क्षेत्र में मलेरिया परिघटनाओं पर पारिस्थितिकी प्रभावों का अध्ययन किया गया।
शोधकर्ता सुमन ने बताया कि कार्बनडाई ऑक्साइड गैस की प्रत्यक्ष भूमिका नजर नहीं आई।
अपेक्षाकृत पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की कमी होने पर गर्मी के महीने में लार्वा पनपने की दर कम हो गई। इस समय व्यस्क मच्छरों की संख्या भी कम दर्ज की गई। शोध में पता चला कि जुलाई से सितंबर पानी में क्षारियता में कमी रही। इससे एनाफिलीज मच्छरों के लार्वा-प्यूपा आदि को पनपने में सहायता मिली।
इस दौरान मच्छरों की संख्या सर्वाधिक पाई गई। ऐसे में बारिश के दौरान में मलेरिया अधिक फैला। सहारण ने बताया कि मच्छरों के लार्वा अत्यधिक तापक्रम तथा क्षारियता नहीं सह पाते, जिससे उनकी मृत्युदर बढ़ती है। गर्मियोंं में ऐसा देखा गया है। यह शोधकार्य वर्ष २०१२ से २०१४ में किया गया था।
५८ प्रजातियों में से छह मलेरिया फैलानी वाली
राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर, गंगनहर एवं अन्य नहरों के आने से मरुस्थलीय परिस्थितियों में बड़ बदलाव हुआ है। जमीनी पानी का स्तर और हरियाली बढऩे से तापक्रम, आद्र्रता में बदलाव मच्छरों के पनपने में सहयोगी साबित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्वभर में ३००-५०० मिलियन मामले मलेरिया के सामने आते हैं। इनमें से दो-तिहाई दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से होते हैं। भारत भी मलेरिया पीडि़त देशों में आता है।
विश्व में एनाफिलीज मच्छर की ४२२ प्रजातियां पाई जाती है। उनमें से लगभग ७० प्रजातियां मलेरिया संक्रमण फैलाती हैं। भारत में ५८ प्रजातियों में से मुख्यता ६-7 प्रजातियां ही मलेरिया फैलाने में सक्रिय हैं। इनमें एनाफिलीज क्युलिसीफेसिस, फ्लुविएटिलिस, स्टीफेन्साई, मिनिमस, सन्डाइकस, सबपिक्टस, डाइरस शामिल हैं। इनमें भी उत्तर भारत के प्रदेशों में एनाफिलीज क्युलिसीफेसिस, स्टीफेन्साई मलेरिया फैलाने में सहायक हैं।
जांच किट सस्ती हो
मलेरिया प्लाजमोडियम वाईवेक्स एवं प्लाजमोडियम फेल्सीपेरम से फैलता है। इनके उपचार के लिए आर्टीईथर, आर्टीमिथर एवं हेलोफेट्रिन व प्रोगुवानिल दवाओं का मिश्रण अधिक कारगर है। सरकार को यह मिश्रण सस्ती दर पर आमजन को मुहैया कराना चाहिए। मलेरिया की जांच किट सस्ती की जानी चाहिए।
डॉ. कैलाश स्वामी, सहआचार्य, प्राणीशास्त्र डूंगर कॉलेज
Published on:
27 Aug 2018 09:58 am
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