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युद्ध के पैनिक में सरसों तेल गर्म, चना भी बढ़ रहा एमएसपी की ओर

- ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर कृ​षि जिंसों के भावों पर पड़ने लगा है। सरकारी समर्थन मूल्य पर सरसों व चना की खरीद 1 अप्रेल से शुरू होगी। सरसों के रेट एमएसपी के पार हो गए है। मौसम, मंदी, युद्ध और भविष्य की आशंकाओं का असर भावों पर पड़ रहा है। एग्रो कमोडिटी पर युद्ध से माल ​आयात प्रभावित होने का असर पड़ा है।

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दिनेश कुमार स्वामी@ बीकानेर. वैश्विक युद्ध के हालात का असर एग्रो कमोडिटी पर सीधा पड़ने लगा है। खाद्य तेलों का आयात प्रभावित होने से सरसों की घरेलू डिमांड ज्यादा हो रही है। यही वजह है कि सरसों के भाव सरकारी समर्थन मूल्य के ऊपर चल रहे है। वहीं चना के भाव भी एमएसपी की तरफ बढ़ रहे है। ऐसे में सरसों व चना की सरकारी खरीद को लेकर राजफैड की चिंता बढ़ रही है।

एमएसपी पर चना-सरसों बेचने के लिए दो दिन से किसानों के लिए पोर्टल पर पंजीयन खुले हुए है। परन्तु किसान इसके प्रति उत्साह नहीं दिखा रहे है। अनाज मंडियों में चना और सरसों की आवक होने लगी है। खुली बोली पर किसानों को सरसों के भाव 6500 रुपए के पार हो गए है। चना भी ऊपर में 5300 रुपए रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है।

खाली रह सकती है सरकार की झोली

सरकारी समर्थन मूल्य सरसों का 6200 रुपए प्रति क्विंटल है। जबकि चने का एमएसपी 5875 रुपए प्रति क्विंटल है। सरसों के भाव एमएसपी को पार कर गए है और चना भी करीब 500 रुपए प्रति क्विंटल ही नीचे है। हालांकि किसानों में चने को एमएसपी पर बेचने के लिए अभी उत्साह है। परन्तु अभी पंजीयन ही करवा रहे है। यदि हाजिर मंडी भाव 1 अप्रेल तक 6 हजार रुपए पर पहुंच गए तो किसान खरीद केन्द्रों पर चना लेकर नहीं आएंगे।

31 खरीद केन्द्रों पर खरीद की तैयारी

राजफैड के क्षेत्रीय अधिकारी शिशुपाल सिंह ने बताया कि जिले में चना व सरसों के 31 संयुक्त खरीद केन्द्र बनाए गए है। ग्राम सेवा सहकारी समितियां व क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से खरीद की जाएगी।

आगामी कृषि उत्पादन व भावों पर यह असर

- खाद्य तेल को आयात समुद्र के रास्ते होता है। ईरान-इजराइल युद्ध से आयात प्रभावित है।- फरवरी में तापमान 35 से 40 डिग्री के बीच रहने से चने का उत्पादन पर 20 प्रतिशत घटा।

- फर्टीलाइजर आयात पर असर से अगली फसल खाद की कमी से प्रभावित होने की आशंका।- अलनीनो 2026 में आने की आशंकाओं से आगे सूखे का सामना करना पड़ सकता है।

- विश्व व्यापी एग्रो कमोडिटी पर संकट की आशंकाएं जताई जा रही है।

युद्ध के लम्बा खींचने के साथ बढ़ रहे भाव

कृषि जिंस कारोबारी विनोद सेठिया के अनुसार युद्ध जैसे-जैसे लम्बा खींच रहा है, कृषि जिंसों के भावों पर असर पड़ रहा है। सरसों 6 हजार रुपए से नीचे बिक रही थी, अब साढ़े छह हजार पर पहुंच गई है। चने के भावों पर भी असर पड़ रहा है। युद्ध लम्बा चला तो भावों पर और भी असर आएगा। अभी मंडी में 10 हजार क्विंटल सरसों की रोजाना आवक है।

एग्रो कमोडिटी पर सीधा असर

युद्ध के चलते सबसे ज्यादा असर तेल-गैस और एग्रो कमोडिटी पर पड़ रहा है। दूसर फेक्टर मौसम का भी है। रबी की फसल के पकाव के समय अचानक से तापमान ज्यादा रहने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ा है। वैश्विक हालात में खाद की आपूर्ति प्रभावित होने का असर अगली फसल पर पड़ने की आशंकाओं ने भी चना-सरसों के भावों में तेजी ला दी है। आगे सुपर अल नीनो से गर्मी में बारिश कम रह सकती है। कुल मिलाकर विश्व एग्रो कमोडिटी पर संकट है।

- पुखराज चौपड़ा, एग्रो कमोडिटी एक्सपर्ट बीकानेर