
राजस्थान प्रबंधकीय एनआरएचएम महासंघ के तत्वावधान में ३४ दिनों से चल रहा एनआरएचएम कर्मियों का सामूहिक अवकाश जारी है । सरकार ने आंदोलन को तोडऩे के हर तरीके को आजमाने के बाद अब सेवा नियमों में छूट का हवाला देकर वापस काम पर लौटने का प्रस्ताव दिया है। सरकार ने 23 अक्टूबर तक कार्मिकों को अपने-अपने पद पर पुन: कार्यग्रहण करने संबंधी आदेश जारी किए हैं।
चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक नवीन जैन ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इस आशय के आदेश जारी किए हैं। वहीं दूसरी ओर संविदा कार्मिक मांग नहीं माने जाने तक काम पर नहीं लौटने पर अड़े हैं। कार्मिकों का कहना है कि सरकार कर्मचारियों को प्रलोभन देकर तोडऩा चाहती है लेकिन, कर्मचारी झांसे में नहीं आने वाले।
यह है आदेश
आदेश में लिखा है कि जो भी संविदा कार्मिक २३ अक्टूबर तक अपने पद पर पुन: कार्यग्रहण करने के लिए संबंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के समक्ष उपस्थित होगा एनआरएचएम भर्ती नियमों के तहत छूट देकर कार्यग्रहण करने की स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
इनका कहना है...
सरकार कर्मचारियों को तोडऩा चाहती है। सरकार के प्रलोभन में संविदा कर्मचारी आने वाले नहीं हैं। प्रदेश के सभी ३३ जिलों के संविदा कार्मिकों से वार्ता हो चुकी है। कर्मचारी मांगें नहीं मानने तक ज्वाइनिंग नहीं करेंगे।
किशोर व्यास, प्रदेश सचिव एनआरएचएम प्रबंधकीय कर्मचारी महासंघ
अगला निर्णय सरकार का
अब तक 20 से 30 प्रतिशत कर्मचारियों ने ज्वाइन कर लिया है। शेष कर्मचारियों को 23 अक्टूबर तक ज्वाइन करने के निर्देश दिए हैं। ज्वाइन नहीं करने वालों के बारे में सरकार को अवगत करा दिया जाएगा। अगला निर्णय सरकार जो करेगी।
नवीन जैन, निदेशक एनएचएम
ग्रामीण अस्पतालों में बिगड़ी व्यवस्थाएं
एक माह से अधिक समय से विभिन्न मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर चल रहे एनआरएचएम कर्मियों के कारण ग्रामीण अंचल के अस्पतालों में विभिन्न व्यवस्थाएं प्रभावित हैं। जानकारी के अनुसार स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में गत 18 सितम्बर के बाद हुए प्रसव में जननी सुरक्षा योजना के तहत एक भी प्रसूता को लाभ नहीं मिल पाया है।
नियमित करने सहित अन्य मांगों को लेकर एनआरएचएम कर्मियों के अवकाश पर होने से यहां नियुक्त कई कर्मचारियों को करीब दो माह से वेतन का भुगतान भी नहीं हो सका है। इसके साथ ही ऑनलाइन होने वाले समस्त कार्य बाधित पड़े है। विभागीय बैठक भी नहीं हो रही है। सूचनाओं का आदान-प्रदान भी ठप होने से योजनाओं की जानकारी नहीं मिल रही है।
यहां नियुक्त आशा सुपरवाइजर के भी अवकाश पर होने से ममता कार्ड सहित अन्य सारी प्रक्रिया ठप पड़ी है। गौरतलब है कि महाजन अस्पताल में लेखाधिकारी व आशा सुपरवाइजर एनआरएचएम कर्मी हैं। प्रसूताओं के रेफर केस में भी निजी वाहन चालकों को किराए के चेक नहीं मिल पा रहे है।

Published on:
23 Oct 2017 12:12 pm
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