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विद्युत निगम की कोताही लील रही इंसानों की जिंदगी

विद्युत निगम द्वारा बरती जा रही कोताही इंसानों की जिंदगियां लील रही है।

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Negligence of electricity corporation

विद्युत निगम की लापरवाही

महाजन. एक तरफ जहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना चलाकर राज्य सरकार ढाणी-ढाणी तक विद्युत सुविधा उपलब्ध करवा रही है। वहीं दूसरी तरफ विद्युत निगम द्वारा बरती जा रही कोताही इंसानों की जिंदगियां लील रही है।

ग्रामीण अंचल में शटडाऊन देने में लापरवाही बरतने के साथ जीएसएस में संसाधनों की कमी भी हादसों का बड़ा कारण बन रही है। बिना लिखित सूचना के ठेकेदार व अन्य लोग मनमानी कर जीएसएस से शटडाऊन लेते है जो हादसों का कारण बन रहे है।

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों में लूणकरनसर उपखण्ड क्षेत्र में कई विद्युत हादसे हो चुके है। गत सप्ताह क्षेत्र में विद्युत कार्य करते समय विद्युत सप्लाई बन्द नहीं होने से ठेकेदार का एक कर्मचारी काल का ग्रास बन गया। गत सप्ताह ही ढाणी छिल्लां के पास करंट की चपेट में आने से एक युवक झुलस गया।

तीन माह पूर्व जैतपुर में एक युवक पोल पर विद्युत कार्य करते हुए करंट की चपेट में आ गया। हालांकि उसकी जान बच गई लेकिन विकलांगता का अभिशाप जीवन भर के लिए मिल गया। करीब दो साल पहले मलकीसर के पास १८ एमकेडी में विद्युत निगम की खामी से एक ससुर व बहूू काल का ग्रास बन गए थे। महाजन व लालेेरां जीएसएस के एक-एक कर्मचारी की भी करंट के कारण अकाल मौत हो चुकी है।

लापरवाही से बढ़ रहे है हादसे
क्षेत्र में ग्रामीणों के साथ विद्युत निगम की लापरवाही भी हादसों का कारण बन रही है। गांवों में जगह-जगह झुलते तार इंसानों व पशुओं के लिए काल साबित हो रहे है। हालात यह है कि अरजनसर में 33 केवी विद्युुत लाइन के पोल व तार कई दुकानों, होटलों व घरों के ऊपर से गुजरते है। एक व्यक्ति ने तो 33 केवी के पोल को अपनी दीवार के अन्दर ले रखा है।

स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा अवलोकन के बाद भी यह लाइन बदली नहीं गई है। नीचे व पुराने तारों से इन दिनों गांवों में पराली से भरे वाहन टकराते है एवं आगजनी की घटनाएं होती है। महाजन स्थित ३३ केवी जीएसएस में अर्थिंग सिस्टम पूर्णतया फेल होने से लोड बढऩे के साथ ही परिसर में करण्ट प्रवाहित होने लगता है। हर बार दीपावली पर्व पर मिलने वाले प्लास, पेचकस आदि उपकरण भी इस बार नहीं मिल पाये है।

जानकारी नहीं देते
शटडाऊन लेते समय ग्रामीण सही जानकारी नहीं देेते है। एवं आनन-फानन में काम करते है। जिससे हादसे होते है। जीएसएस में अर्थिंग सिस्टम एकदम सही है। बिना अर्थिंग तो जीएसएस चल ही नहीं पाते है।
एन.के. माथुर, अधीशासी अभियंता विद्युत निगम बीकानेर