
७५ बिस्तर का अस्पताल, सोनोग्राफी मशीन नहीं निजी लैब पर हो रही मरीजों की जेब ढीली
नोखा. जिले के ग्रामीण अंचल के सबसे बड़े बागड़ी अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां पर आने वाली प्रसूताओं व अन्य मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, अस्पताल में हर माह २५० से ३०० प्रसव भी कराए जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सोनोग्राफी कराना जरूरी है, लेकिन अस्पताल में सोनोग्राफी नहीं होने से महिला मरीजों को प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटरों पर ६०० से १५०० रुपए देकर सोनोग्राफी करानी पड़ती है। वहीं अस्पताल में प्रतिदिन ७००-८०० मरीजों की ओपीडी रहती है। इनमें सबसे ज्यादा महिला रोगी आती हैं। शहर में ३५ वार्ड और ६७ ग्राम पंचायतों वाले गांवों की करीब तीन लाख से अधिक आबादी के बाद भी अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन की सुविधा नहीं है। मरीज व परिजनों ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा पेट के रोगों, पथरी व अन्य आंतरिक रोगों की जांच के लिए सोनोग्राफी करवाने के लिए कहा जाता है, तो मजबूरी में प्राइवेट सेंटरों पर जेब ढीली कराकर ही सोनोग्राफी करानी पड़ती है।
गर्भवती को करानी होती सोनोग्राफी जांच
गर्भवती महिलाओं को दो से तीन बार सोनोग्राफी जांच कराने की आवश्यकता पड़ती है। प्रसव से पूर्व जांच सभी महिलाओं के लिए जरूरी है। जरूरत पडऩे पर और भी जांच करानी पड़ती है। इसके अलावा पेट संबंधित बीमारी की जांच पथरी, पिताशय, अपेंडिक्स, किडनी, छोटी व बड़ी आंत में रूकावट होने पर सोनोग्राफी कराने की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में रोगी या तो बीकानेर जाते हैं, या फिर प्राईवेट सोनोग्राफी सेंटरों पर जाकर जांच कराते हैं।
पद ही स्वीकृत नहीं
&यहां अस्पताल में सोनोग्राफी डॉक्टर का पद ही स्वीकृत नहीं है। पहले तो पद स्वीकृत हो, उसके बाद ही सोनोग्राफी मशीन लगाई जा सकती है। इसके लिए विभाग को पत्राचार भी किया था।
डॉ. पीसी तंवर,
प्रभारी बागड़ी अस्पताल नोखा।
Published on:
08 Mar 2019 11:45 am
