
पीबीएम अस्पताल
बीकानेर. संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में एक व्यवस्था पटरी पर आती है तो दूसरी व्यवस्था बेपटरी हो जाती है। इन दिनों वार्डों में बेडशीट (चादर) मामले में लापरवाही सामने आ रही है। पिछले 10-12 दिनों से कई वार्डों में अधिकतर बेड पर चादर ही नहीं है। मरीज अपने घरों से चादर लेकर आ रहे हैं। चादर नहीं होने की वजह धुलाई नहीं होना बताया जा रहा है, जबकि पीबीएम प्रशासन चादर धुलाई पर सालाना 13 लाख रुपए से अधिक राशि खर्च कर रहा है।
पीबीएम अस्पताल में 2100 बेड हैं। इसके अलावा ऑपरेशन थियेटर, लेबररूम व ट्रोमा सेंटर में प्रतिदिन 900 से 1000 चादर काम में ली जाती हैं। इन चादरों पर हर माह एक लाख 14 हजार 300 रुपए का धुलाई का खर्चा होता है। धुलाई पर हर साल करीब 13 लाख 71 हजार 600 रुपए का खर्चा पीबीएम प्रशासन वहन कर रहा है।
धुलाई में खानापूर्ति
वार्डों में बेडों पर बिछने वाली चादरों की धुलाई में खानापूर्ति हो रही है। पीबीएम के जे वार्ड में भर्ती एक मरीज के परिजन का कहना है कि चादरों की धुलाई सही नहीं हो रही है, जिससे इनमें बबदू आती है। इतना ही नहीं, इनके दाग-धब्बे भी साफ नहीं होते हैं। अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि चादरों की धुलाई अच्छे से करवाई जाई, ताकि अन्य मरीजों को संक्रमण का खतरा न हो।
यह है नियम
नियमानुसार हर दिन मरीज की चादर बदलना अनिवार्य है। अगर मरीज गंभीर है और बार-बार किसी कारण चादर खराब हो रही है तो भी उसे बदलना चाहिए। सामान्य मरीजों में चादर गंदी हो या न हो, अगले दिन जरूर बदली जानी चाहिए।
इन्फेक्शन का खतरा
चादर साफ-सुधरी होना जरूरी है। गंदी चादर के कारण क्रॉस इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।
डॉ. ललित सिंगारिया, निजी चिकित्सक
ठेका दिया हुआ है
चादर धुलाई का ठेका दिया हुआ है। पिछले कई दिनों से कपड़ों से पानी निचोडऩे वाली मशीन खराब है, जिससे सारा काम मैनुअल होने से दिक्कत आ रही थी। अब मशीन ठीक हो गई है।
डॉ. पीके बैरवाल, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल
Published on:
01 Sept 2017 10:29 am
बड़ी खबरें
View Allबीकानेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
