
25 साल में बदलती गई मरुधरा की तस्वीर, पहले 1.46 करोड़ थी भेड़ें, अब महज 79 लाख
बीकानेर. देश में राजस्थान की पहचान पशुपालन के रूप में ज्यादा है। यहां के व्यवसाय की रीढ़ भी पशुपालन को ही माना जाता है। हालांकि, अब स्थिति बदल रही है। अब पशुपालकों का रुझान इस पेशे के प्रति कम हो रहा है। यही कारण है कि कभी भेड़ पालन में देश में एक नंबर पर रहने वाला राजस्थान आज चौथे स्थान पर लुढ़क गया है। अगर सरकार ने इस व्यवसाय को समय रहते नहीं संभाला, तो शनै: शनै: यह और कमजोर होता जाएगा। हालांकि, भेड़ अनुसंधान संस्थान इस क्षेत्र में प्रयास भी कर रहा है, लेकिन सीमित संसाधनों की वजह से उसके प्रयास ऊंट के मुंह में जीरा जैसे ही साबित हो रहे हैं। गौरतलब है कि ताजा सूची में तेलंगाना राज्य भेड़ पालन में अव्वल नंबर पर है। जबकि कभी राजस्थान से नीचे रहने वाला कर्नाटक अब दूसरे स्थान पर आ गया है।
भेड़ पालन कम होने का कारण
केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि काफी समय से ऊन के भाव स्थिर होने के अलावा सिंचित क्षेत्र में अन्य फसलों के प्रति रुझान ज्यादा हो रहा है, जबकि भेड़ों के लिए चारे की कमी आ रही है। इसके अलावा यहां पर भेड़ को सिर्फ ऊन उत्पादक के रूप में ही पाला जा रहा है, जबकि अन्य प्रदेशों में इसे अन्य कामों में भी लिया जा रहा है। तीसरा बड़ा कारण ऊन के भाव है। तकरीबन 15 साल पहले भेड़ के ऊन के जो भाव थे, उन भावों में आज भी ज्यादा तेजी नहीं आई है। तीन सौ रुपए किलो के आसपास भाव स्थिर रह रहे हैं। जबकि आनुपातिक रूप से देखें, तो चारे के भाव आसमान छू रहे हैं। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ आशीष चौपड़ा का मानना है कि सिंचाई क्षेत्र में चारा हो नहीं रहा है। किसानों का रुझान लाभ वाली फसल के प्रति ज्यादा रहने लगा है। गोचर में भी भेड़ों को चरने नहीं दिया जाता है।
पांच सौ के रेवड़ में साठ भेड़े
कभी भेड़ों के रेवड़ में पांच सौ से सात सौ तक भेड़ चलते थे, लेकिन अब यह संख्या साठ तक सीमित हो गई है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने कुछ साल पहले बाड़मेर, जालौर, जोधपुर तथा बीकानेर में रेवड़ का सर्वे किया था। इस सर्वे में भेड़ों की संख्या बहुत ही कम नजर आई। गौरतलब है कि साल 1997 में राजस्थान में भेड़ों की संख्या एक करोड़ 46 लाख थी, जो अब धीरे-धीरे सिमट कर मात्र 79 लाख ही रह गई है। फिलहाल, तेलंगाना एक करोड़ 91 लाख के साथ पहले, आंध्रप्रदेश एक करोड़ 76 लाख के साथ दूसरे और कर्नाटक एक करोड़ 12 लाख के साथ तीसरे स्थान पर है।
Published on:
15 Dec 2022 02:17 am
