
पुलिस कंट्रोल रूम पर भारी पड़ रही थानों की होशियारी
पुलिस कंट्रोल रूम पर भारी पड़ रही थानों की होशियारी
बीकानेर/जयप्रकाश गहलोत. पुलिस के पास अपराध नियंत्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है पुलिस कंट्रोल रूम। जहां पूरे जिले में घटने वाली वारदात और अपराध की सूचना तुरंत मिलने पर त्वरित कार्रवाई और पुलिस के आला अफसरों को सूचना दी जाती है। आमजन भी मदद के लिए तुरंत कंट्रोल रूम के टोलफ्री नम्बर १०० पर कॉल कर मदद मांगता है। वारदात के बाद फरार अपराधियों को दबोचने के लिए नाकाबंदी कराने जैसी कार्रवाई होती है। परन्तु बीकानेर का पुलिस कंट्रोल रूम थानों की होशियारी से परेशान है।
रानी बाजार पुलिया के पास स्थित पुलिस कंट्रोल रूम (नियंत्रण कक्ष) में अन्य जिलों के भांती जिलेभर में हुई गिरफ्तारियों की सूचना बोर्ड पर प्रदर्शित नहीं मिलेगी। जिले के दूर-दराज के थाने को तो छोड़ों शहर में कोई वारदात होने या पुलिस कार्रवाई की अपडेट सूचना यहां नहीं रहती। जब आम आदमी या मीडियाकर्मी तक पुलिस कंट्रोल रूम से कोई जानकारी लेना चाहते है तो जवाब मिलता है 'सब खैरियत है।Ó
थानों में हालत खराब
शहरी हो या ग्रामीण थानों में हालात बेहद खराब है। थानों में या तो कोई फोन उठाता नहीं और कभी-कभार फोन रिसीव करते है तो सूचना देने से कतराते है। नियमानुसार थाने में मुकदमा दर्ज होने या गिरफ्तारी होने पर उसकी सूचना तुरंत सार्वजनिक करनी होती है। परन्तु पुलिस थाने अपनी सुविधा अनुसार ही सूचना देते है। जिसमें खुद का फायदा नजर आता है वही जानकारी देते है शेष को दबा जाते है।
रिपोर्ट भी अधूरी
पुलिस नियंत्रण कक्ष में रोजाना सुबह-शाम मॉर्निंग-इवनिंग रिपोर्ट हर थाने से ली जाती है। आज कल तो ई-मेल जैसी सुविधा तक है। इसे सामान्य भाषा में 'डेलीÓ बोलते है। जिसका बकायदा चार्ट होता है और उसे भरकर सार्वजनिक करने के लिए बकायदा मीडिया को जारी करना होता है। गिरफ्तारी और मुकदमे की जानकारी पुलिस नियंत्रण कक्ष पर चस्पा करनी होती है। पुलिस थाने नियंत्रण कक्ष को आधी-अधूरी जानकारी देते है। वह भी सुबह देने वाली शाम को। एेसे में नियंत्रण कक्ष का मकसद पूरा नहीं हो रहा है। एेसे थानों की नियंत्रण कक्ष के अधिकारी रिमार्क भी डालते है। परन्तु फिर भी थाने सुधर नहीं रहे।
..मगर फायदा नहीं
बीकानेर में पुलिस महानिरीक्षक बैठते है। रेंज के चार जिले बीकानेर, श्रीगंगानगर, चूरू व हनुमानगढ़ का पूरा विवरण रखना पड़ता है। जरूरी सूचनाएं संबंधितों तक तुरंत पहुंचे इसके लिए कंट्रोल रूम को लाखों रुपए खर्च कर अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए गए है। हैड फोन माइक, ट्रयू कॉलर, जीपीएस सिस्टम, रिर्जव जाब्ता, पीसीआर व पेट्रोलिंग वाहन मॉनिटरिंग होती है। परन्तु खुद थानों के सहयोग नहीं करने से सब बेकार पड़े है।
इनकी बेबसी
पुलिस अधीक्षक को अवगत करा चुके हैं। सभी एसएचओ को दो-तीन बार निर्देश दे चुके हैं लेकिन, सूचनाएं समय पर नहीं मिलती। वारदात होने के दो-तीन घंटे बाद तक कंट्रोल रूम को बताते ही नहीं। सूचना नहीं होने के कारण कंट्रोल रूम बेबस है।
राजेश कुमार, प्रभारी पुलिस
कंट्रोल रूम
Published on:
08 Jun 2018 11:21 am
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