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राजस्थानी भाषा से भी ज्यादा समृद्ध है इसका शब्दकोश

साहित्यकार और विद्वान भाषा का पाठ्यक्रम बनाएं

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राजस्थानी भाषा से भी ज्यादा समृद्ध है इसका शब्दकोश

बीकानेर. राजस्थानी भाषा पूरे विश्व में प्रचलित सभी भाषाओं में सबसे समृद्ध भाषा है और इससे भी समृद्ध इस भाषा का शब्दकोश है। राजस्थानी भाषा के साहित्यकारों व विद्वानों को इस भाषा का पूरा पाठ्यक्रम तैयार कर उसमें भी प्रशासनिक शब्दावली का प्रयोग भी ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। ये बात गुरुवार को ऊर्जा व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री डॉ. बुलाकीदास कल्ला ने महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग में अध्ययनरत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति वितरण समारोह में कही। डॉ. नंदकिशोर आचार्य ने कहा कि लोकतांत्रिक सरकार को राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की बात माननी होगी। राजीव हर्ष, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो भागीरथ सिंह, उप कुलपति बिठ्ठल बिस्सा आदि ने संबोधित किया। कुलसचिव राजेंद्र डूडी, डॉ. मेघना शर्मा, डॉ लाल मेहता, सरल विशारद, डॉ प्रशांत बिस्सा, अनंत जोशी, सुमित कोचर, बृजरतन जोशी, डॉ. नमामि शंकर आचार्य, कमल रंगा सहित राजस्थानी भाषा के साहित्यकार और शोध विद्यार्थी उपस्थित थे।

भामाशाह प्रहलाद राय गोयनका ने कहा कि अगर एमजीएसयू में राजस्थानी भाषा पर कोई डिग्री कोर्स शुरू होता है तो उसमें हर स्तर पर सहयोग किया जाएगा। साथ ही उन्होंने ऊर्जा मंत्री डॉ. कल्ला से कोलकाता में स्थित राजस्थानी सूचना केंद्र में सुधार कर और विकसित करवाने की बात कही।

मोहता व गांधी की स्मृति में खुले केंद्र
डॉ. कल्ला ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर विश्वविद्यालय में गांधी अध्ययन केंद्र और आगामी सत्र से बीकानेर के ख्यातनाम दर्शन शास्त्री छगन मोहता की स्मृति में भी एक अध्ययन केंद्र खोला जाए। इन दोनों अध्ययन केंद्रों के प्रारंभ होने से विश्वविद्यालय में आने वाले लोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और छगन मोहता के साहित्य को और नजदीक से पढ़ और शोध कर सकेंगे।
जायजा लिया
डॉ. कल्ला ने एमजीएसयू के राजभवन में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्यों में बीकानेर की स्थापत्यकला, विवि. के सौंदर्य का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।