
Rajasthan election 2023 बीकानेर। चार साल भाजपा से बाहर रहने के बाद आखिर गुरुवार रात वरिष्ठ नेता देवीसिंह भाटी की पार्टी में वापसी हो गई। भाटी समर्थक लम्बे समय से उन्हें भाजपा में वापस शामिल करने की मांग भी कर रहे थे। भाटी की राजनीति के केन्द्र में भले ही कोलायत विधानसभा क्षेत्र है, लेकिन राजनीतिक असर जिले की अन्य सीटों पर भी रहता है।
पिछले लोकसभा चुनाव 2019 में भाटी ने अर्जुनराम मेघवाल को बीकानेर लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाने का खुलकर विरोध किया था। हालांकि इससे ठीक पहले 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी पुत्र वधू पूनम कंवर कोलायत विधानसभा सीट से भाजपा की प्रत्याशी रही थीं। पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते भाटी का मामला भाजपा की अनुशासन समिति के पास भेजा गया। कोई निर्णय होता, इससे पहले ही खुद भाटी ने भाजपा को अलविदा करने का एलान कर दिया था।
अब टिकट की दौड़ में...
जिले की कोलायत विधानसभा सीट बनने के बाद से दलगत राजनीति की जगह व्यक्तिवादी राजनीति हावी रही है। एक दशक पहले तक यहां भाजपा और कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा नाम मात्र का ही रहा। देवीसिंह भाटी के भाजपा छोड़ने के बाद संगठन का ढांचा खड़ा हुआ तथा ओबीसी और सामान्य वर्ग के साथ एससी वर्ग से कई भाजपा नेता सक्रिय हुए। टिकट दावेदारों में भी कई नेताओं के नाम चल रहे हैं।
लगातार 7 बार विधायक और भाजपा सरकारों में मंत्री रहे भाटी की वापसी से इस सीट पर अब खुद देवी सिंह भाटी, उनकी पुत्रवधू और पौत्र टिकट की दौड़ में शामिल हो गए हैं। भाजपा की पहली सूची में यह सीट शामिल हो सकती है।
Published on:
29 Sept 2023 05:19 pm
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