
Rajasthan election
रमेश बिस्सा
बीकानेर . 'पश्चिम सूं कुण ला रयो टिकट...। रैल्यों में तो भीड़ होयरी है, हवा कैरी चाल रैई है। कीकाणी व्यासों के चौक में पाटे पर हथाई करते शिवजी व्यास एेसा बोले तो पास बैठे विश्म्बर बोल पड़े 'भायला भीड़ सूं तो क्या ठा पड़। टिकट आसी जण ही ठा पड़ला। कुछ इस तरह की चर्चा इन दिनों भीतरी परकोटे के पाटों, गली-मोहल्लों में देर रात तक होती है।
वैसे तो पाटों पर होने वाली हथाई में देश-विदेश की चर्चाएं होती रहती है। परन्तु चुनावी मौसम में रौनक ही अलग दिखती है। दिनभर कामकाज की थकान के बावजूद हर कोई पाटे पर आकर इस चर्चा का हिस्सा बनने को उत्सुक रहता है। पाटों पर अभी चुनावी चर्चाओं के केन्द्र में प्रत्याशियों की टिकट की बात ही मुख्य रहती है। कीकाणों के चौक से निकलकर अगले चौक में पहुंचे तो...दूर से ही पाटे पर बैठे लोग बोले 'मीडिया कांई कैवे भायला। जवाब देने से पहले ही पाटै पर मौजूद महाराज बोल पड़े 'टिकट तो कल्लोजी रो...बतावे, पास बैठा युवक बोला तो फेर सामै जोशीजी... होवैला या तो रांको।
अपने-अपने कयास
पाटों की चर्चा में लोग अपने-अपने दावे और कयास लगा रहे है। लेकिन बात को पूरी दृढ़ता और आत्म विश्वास के साथ रखते है कि सुनने वाला उसे नकारने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। पाटों पर ९ बजे के बाद हथाई के लिए लोगों का जमावड़ा बढऩे लगता है। कई बार तो चुनाव पर बहस जोर पकड़ जाती है तो बुढ़े-बुर्जुग हंसी-मजाक कर माहौल को बदल देते है। सामूहिक चर्चाओं में एक बात समान होती है, वो है शहर के मुद्दे। जिन पर बेबाक रूप से चर्चा करते है।
Published on:
24 Oct 2018 08:38 am
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