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मर्यादा का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए: बाबा रामदेव

नोखा. मूलवास-सीलवा स्थित पदम पैलेस में गोसेवी पदमाराम कुलरिया परिवार की ओर से चल रही राम कथा में सोमवार को संत समागम में योग गुरु बाबा रामदेव पहुंचे। उन्होंने कथा में भक्तिरस में डूबकर श्रोताओं को प्रवचन दिए। साथ ही यौगिक क्रियाएं कर नियमित रूप से योग करने का संकल्प भी दिलाया।

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Ram Katha

Ram Katha


नोखा. मूलवास-सीलवा स्थित पदम पैलेस में गोसेवी पदमाराम कुलरिया परिवार की ओर से चल रही राम कथा में सोमवार को संत समागम में योग गुरु बाबा रामदेव पहुंचे। उन्होंने कथा में भक्तिरस में डूबकर श्रोताओं को प्रवचन दिए। साथ ही यौगिक क्रियाएं कर नियमित रूप से योग करने का संकल्प भी दिलाया।

बाबा रामदेव ने कहा कि हमारे दिमाग की प्रोग्रामिंग गलत होने से सॉफ्टवेयर करेप्ट हो जाता है और इंसान उल्टा-पुल्टा काम करने लगता है। जिस काम को करने से आत्मा मना करे, उसे कभी नहीं करना चाहिए। धर्म के मार्ग से कभी नहीं डिगना चाहिए, जितना हो सके अपने ज्ञान, सामथ्र्य से लोगों का भला करना चाहिए। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम से एक बात सीखो कि हमें मर्यादा का कभी अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। मर्यादित होकर जीवन जीओगे, तो जीवन में कभी कठिनाई नहीं आएगी। भगवान शंकर की तरह विष पीकर अमृत की वर्षा करते रहना चाहिए। जीवन में संगत व विचारों का बड़ा महत्तव है, जैसा करोगे विचार, वैसा होगा संसार। बाबा रामेदव ने कहा कि आजकल लोग तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन सहित शरीर में कई तरह के रोगों से पीडि़त हैं। उन्होंने कहा कि सुबह उठकर नियमित रूप से योग करेंगे, तो सारी बीमारियां स्वत ही भाग जाएंगी। उन्होंने कई तरह के योगाभ्यास कराते हुए नियमित करने की बात कही।

मैं फॉर इन वन
बाबा रामदेव ने कहा कि अक्सर लोग उनसे पूछते रहते हैं कि वे योग गुरु है या बिजनेस गुरु! उनसे एक ही बात कहता हूं कि जो अज्ञान को दूर करे, वह ब्राह्मण, अन्याय को दूर करे, वह क्षत्रिय, अभाव को दूर करे, वह वैश्य और अपवित्रता को दूर करे, वह क्षुद्र। इन चारों को ही दूर करने का काम वे कर रहे हैं, इसलिए मैं फॉर इन वन हूं। धर्म, कर्म, अर्थ और मोक्ष, इन चारों का समन्वय ही जीवन है।

मुक्तकंठ से की प्रशंसा
उन्होंने कहा कि पैसा तो बहुत से लोगों के पास है, लेकिन धर्म-कर्म पर जो पैसा खर्च होता है, उससे पुण्य मिलता है। पदमाराम कुलरिया परिवार मूलवास जैसे छोटे से गांव में इंटरनेशनल कथा करवा रहे हैं। यहां पर रोजाना दूर-दराज के गांव-ढाणियों से आकर हजारों लोग ही कथा का श्रवण नहीं कर रहे हैं, बल्कि अखबार, टीवी चैनलों, सोशल मीडिया पर लाखों-करोड़ों लोग देश-विदेश में बैठकर भी इस कथा को देख व सुन रहे हैं। इस पुनित कार्य के लिए पदमाराम कुलरिया व उनके सुपुत्र साधुवाद के पात्र है। उन्होंने मौजूद बच्चों से मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम के आदर्श को लेकर कई तरह के प्रश्न पूछे, तो बच्चे उत्तर देकर प्रफुल्लित नजर आए। बाबा रामदेव ने भजन, देवी सम्पदा श्लोक भी सुनाए। उन्होंने नशे से दूर रहने का संकल्प दिलाया।

इनका हुआ सम्मान
कथा में कुलरिया परिवार की और से बाबा रामदेव का साफा पहनाकर व शॉल ओढाकर स्वागत किया गया। रोड़ा धाम महंत भंवरदास महाराज, मक्खनलाल व्यास, बल्लभदास व्यास, अशोक महाराज, संत चूनाराम आदि का अभिनंदन कानाराम कुलरिया ने शॉल ओढ़ाकर किया।

कथा प्रेमी रहे मौजूद
कथा में हीरालाल माकड़, हनुमान सुथार, किसनलाल भंवरलाल, हनुमानराम, मोहनलाल धामू, रामचंद्र जांगिड़, श्याम जांगिड़, मोहित जांगिड़, रामवतार वैष्णव, गिरधारी सोनी, सत्यनारायण नागल, मूलचंद नागल, नाथूराम नागल, रामेश्वर लाल, अशोक सुथार, श्याम सुथार, हनुमानराम, रामूलाल, हनुमानराम, मोहनलाल गांधीधाम, तुलछाराम कुलरिया, जेपी जांगिड़ व गुलाबचंद आदि विशिष्ट अतिथि थे। कथा में बीकानेर, नागौर, जोधपुर जिले से हजारों कथा प्रेमी मौजूद रहे।

जीवन को परोपकार में लगाएं : संत मुरलीधर
कथा व्यास संत मुरलीधर ने शंकर-पार्वती विवाह की कथा का वृतांत सुनाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन परोपकार में लगाना चाहिए। जो अपना जीवन परोपकार में लगाता है, वह प्रशंसनीय होता है। जैसे योग गुरू बाबा रामदेव ने अपना जीवन परमार्थ के लिए न्यौछावर कर दिया। संसार में परोपकारियों का नाम अनादिकाल तक लिया जाता है। कथा में कामदेव को भगवान शंकर द्वारा भस्म करने का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने गुरु के प्रति श्रद्धा भाव रखने, उन पर विश्वास करने और साधु-संतों का सम्मान करने की बात भी कही। कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य यजमान गोसेवी पदमाराम-हरप्यारी देवी कुलरिया, उगमाराम, देवकिसन, मघाराम, कानाराम-शंकर-धर्म कुलरिया, सुरेश, नरेश, पुखराज, पंकज व परिजनों ने रामचरितमानस का पूजन किया।


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