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103 अधिकारियों की टीमें पहुंची स्कूलों में, हुई जाँच तो मिली खामियां

जिले के पांच सौ स्कूलों में १०३ अधिकारियों की टीमों ने दो दिन रैंडम निरीक्षण किया।
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 inspection of schools

law of a school building is to improve education in katni

बीकानेर. जिले के पांच सौ स्कूलों में १०३ अधिकारियों की टीमों ने दो दिन रैंडम निरीक्षण किया। इसकी जिला स्तर पर मिली प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध के दाम समितियों को ज्यादा दिए जा रहे हैं। इसके लिए नोडल अधिकारियों की बैठक कर दूध समितियों से दूध के भावों को लेकर नेगोशिएशन करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान पोषाहार में फल नहीं देने, साफ-सफाई और अन्य तरह की कमियां पाए जाने पर १५ स्कूलों को नोटिस दिए गए हैं।

टीमों ने मंगलवार व बुधवार को किए निरीक्षण में अन्नपूर्णा दूध योजना में काम ठीक पाया गया। मिड-डे मील में अब भी पोषाहार बनाने के लिए गांवों में गैस कनेक्शन नहीं है। ऐसे स्कूलों में अधिकारियों ने अगले १५ दिन में गैस कनेक्शन करवाने के निर्देश दिए। इस दौरान कुक कम हेल्पर ने मानदेय १३२० रुपए से बढ़ाकर १५०० रुपए करने का निरीक्षक दल से आग्रह किया।

पूरे राज्य में निरीक्षण पूरा
प्रदेश में अन्नपूर्णा दूध योजना एवं मिड-डे मील को लेकर चालू शैक्षणिक सत्र में रैंडम निरीक्षण का सबसे बड़ा अभियान बुधवार को पूरा हुआ। इसमें राज्य के २० प्रतिशत स्कूलों को निरीक्षण किया गया। निरीक्षण की रिपोर्ट तैयारी की जा रही है। १४ अगस्त तक समीक्षा के बाद कार्रवाई रिपोर्ट मिड-डे मील आयुक्तालय को भेजनी होगी।

सुधार के निर्देश
जिलेभर के पांच सौ स्कूलों में रैंडम निरीक्षण में मोटे तौर पर अन्नपूर्णा दूध योजना की स्थिति सही पाई गई। मिड-डे मील में छोटी-मोटी कमियां पाई गई। इनमें सुधार के मौके पर ही निर्देश दे दिए गए। कई तरह की कमियों के लिए १५ स्कूलों को नोटिस दिए गए हैं।
उमाशंकर किराडू, जिला शिक्षा अधिकारी, बीकानेर

निरीक्षण में मिली कमियां, दिए निर्देश

- कुछ स्कूलों में खाद्य सामग्री अन्नपूर्णा भण्डार से नहीं खरीदी जा रही है, उन्हें अन्नपूर्णा भण्डार से सामग्री खरीदने के निर्देश दिए गए।
- शहरी क्षेत्र में कई स्कूल किराए के भवन में चल रहे हैं। इनमें रसोईघर नहीं है। रसोई घर की वैकल्पिक व्यवस्था के सुझाव दिए गए।
- स्कूलों में गेहूं व चावल को बोरियों में रखने की बजाय लोहे की टंकियों में रखने को कह गया।
- जिन स्कूलों में पोषाहार भण्डार सही नहीं पाए गए, साफ-सफाई नहीं मिली, उनको नोटिस दिए गए।
- सभी स्कूलों को पांच वर्षों का गेहूं एवं चावल का हिसाब-किताब मांगा गया है।

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