
roadways strike
बीकानेर. पहले ही घाटे से जूझ रहा रोडवेज प्रबंधन अपनी स्थित संभाल नहीं पा रहा, अब कर्मचारियों की चक्काजाम हड़ताल ने रोडवेज को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचा दिया है। रोडवेज के कर्मचारी, चालक व परिचालक मंगलवार को दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे और यहां केन्द्रीय बस स्टैण्ड पर सन्नाटा रहा। रोडवेज बसें नहीं चलने से यात्री भी परेशान होते रहे। उन्हें मजबूरन निजी बसों या अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
बीकानेर आगार से रोजाना 118 बसें संचालित होती हैं, लकिन दूसरे दिन भी सभी बसें आगार परिसर में खड़ी रही। दूर-दराज से आए यात्री निराश होकर लौटते रहे। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, पीलीबंगा, रायसिंहनगर व अन्य क्षेत्र से रामदेवरा दर्शन कर लौटने वाले श्रद्धालुओं को ज्यादा परेशानी हुई।
रोडवेज प्रबंधन को इन दिनों मेले-मगरियों से आय बढऩे की उम्मीद थी, लेकिन हड़ताल ने इस पर पानी फेर दिया। हड़ताल के कारण बीकानेर आगार को 37 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हो चुका है। आगार को बसों से रोजाना 16 लाख क ा राजस्व मिलता है, जो अब बंद है।
अभी रामदेवरा मेले में बीकानेर आगार से लगी पांच बसों से रोजाना 80 हजार रुपए की आय हो रही थी। इनमें चार बसें बीकानेर डिपो पर डीजल भराने आई थी, जो हड़ताल के चलते यहीं अटकी हुई है। अब वहां एक ही बस लगी हुई है। वहीं पूनरासर मेले में यदि दो दिन अतिरिक्त बसें चलती तो रोडवेज को 4 लाख रुपए की आय होती। रोडवेज की इस मेले के लिए करीब एक दर्जन बसें अतिरिक्त चलाने की योजना थी।
हड़ताल के ५ दुष्परिणाम
परेशानी का सफर
रोडवेज बसों की हड़ताल के कारण दो दिन से हजारों यात्री परेशान हैं। वे बसस्टैंड तक तो पहुंचते हैं, लेकिन बस नहीं आने से मायूस लौट जाते हैं। जातरू और श्रद्धालु भी बसें नहीं मिलने से अधिक किराया देने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा घाटा
संभाग में इन दिनों मेले-मगरियों का सीजन है। इसमें रोडवेज अतिरिक्त बसें लगाकर
आय बढ़ता है। हड़ताल से
मेलों के लिए बसें नहीं चल पाई और रोडवेज को लाखों रुपए का घाटा हुआ है।
निजी की मनमानी
रोडवेज बसें नहीं चलने का निजी बस ऑपरेटर खूब फादया उठा रहे हैं। यात्रियों की संख्या को देखते हुए वे मनमाना किराया
तक वसूलने से नहीं चूक रहे। यात्रियों को मजबूरन अधिक किराया देना पड़ रहा है।
अवैध परिवहन
हड़ताल से अवैध परिवहन
को भी बढ़ावा मिला है। निजी
बसों के साथ अवैध वाहन भी धड़ल्ले से सवारी ले जा रहे हैं और जोखिम से भी नहीं चूक
रहे। इनकी जांच करने वाला भी कोई नहीं है।
पगार पर मार
रोडवेज कार्मिकों की पगार पर हड़ताल भारी पड़ सकती है।
घाटे से जूझ रहे रोडवेज की
राजस्व का नुकसान होने से वेतनभोगी, पेंशनर को भुगतान में बाधा सकती है। हड़ताली कार्मिकों की पगार भी कट सकती है।
लाखों का नुकसान
११८ बसें है बीकानेर
आगार में
३५० कर्मचारी हड़ताल पर
३७ लाख रुपए का
नुकसान हड़ताल से
0४ लाख रुपए का नुकसान पूनरासर मेले में अतिरिक्त बसें नहीं लगने से
0४ बसें नहीं जा पा रही रामदेवरा मेले में
इन मांगों पर अडिग़
रोडवेज कर्मचारियों का संयुक्त मोर्चा सातवां वेतनमान लागू करने, बकाया भुगतान समय पर दिलाने, नई बसें देने कई मांगों को लेकर आंदोलनरत है। जुलाई में हुई हड़ताल के दौरान राज्य सरकार ने समझौता किया था, लेकिन उसे लागू नहीं करने से खफा कर्मचारियों ने 17 सितंबर से फिर चक्काजाम कर दिया। हड़ताल में संयुक्त मोर्चा के गिरधारीलाल, विक्रम ङ्क्षसह, जगतपाल, हनुमंत मेहरा, रविन्द्र जैतली, किशन सिंह, शब्बीर मोहम्मद, भूराराम, मोहरसिंह आदि शामिल हुए।
Updated on:
19 Sept 2018 08:23 am
Published on:
19 Sept 2018 08:23 am
