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अश्व अनुसंधान केंद्र में आएगा सिंधी नस्ल का घोड़ा

केन्द्र के अधिकारियों ने ली गुजरात जाकर सिंधी नस्ल के घोड़े की जानकारी सरकार से मांगी अनुमति राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र बीकानेर में जल्द ही मारवाड़ी, काठियावाड़ी के साथ सिंधी नस्ल का घोड़ा भी देखने को मिलेगा। जल्द ही गुजरात के सिंधी नस्ल का घोड़ा लाया जाएगा। केन्द्र में सिंधी नस्ल के घोड़े के संरक्षण, संवर्धन होगा। साथ ही इस घोड़े की नस्ल को कृत्रिम गर्भाधान से आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए केन्द्र के अधिकारियों ने गुजरात जाकर सिंधी नस्ल के घोड़े की पूरी जानकारी ली। सरकार से अनुमति मांगी है।

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Sindhi breed horse will come in center

अश्व अनुसंधान केंद्र में आएगा सिंधी नस्ल का घोड़ा

बीकानेर. राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र बीकानेर में जल्द ही मारवाड़ी, काठियावाड़ी के साथ सिंधी नस्ल का घोड़ा भी देखने को मिलेगा। जल्द ही गुजरात के सिंधी नस्ल का घोड़ा लाया जाएगा। केन्द्र में सिंधी नस्ल के घोड़े के संरक्षण, संवर्धन होगा। साथ ही इस घोड़े की नस्ल को कृत्रिम गर्भाधान से आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए केन्द्र के अधिकारियों ने गुजरात जाकर सिंधी नस्ल के घोड़े की पूरी जानकारी ली। सरकार से अनुमति मांगी है।

अधिकारियों ने बताया कि सिंधी नस्ल का घोड़ा बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर सहित गुजरात में पाया जाता है। भारत व पाकिस्तान बंटवारे से पहले से यह सिंध प्रांत होता था। यह घोड़ा रेगिस्तान में आसानी से चल सकता था। पहले से ही इस घोड़े का बहुत उपयोग होता था। रेगिस्तान में ऊ ंट के बाद घोड़ा ही सामान परिवहन में काम आता था। यह हल्के भूरे रंग का होता है।

रेवाल चाल के लिए मशहूर
देश में रेवाल चाल के लिए सिंधी घोड़ा काफी मशहूर है। रेवाल चाल का मतलब है कि इस घोड़े की औसत चाल ४० किलोमीटर प्रति घंटा है। इस रेवाल चाल का मतलब है अगर घोड़े से घी, दूध का परिवहन किया जाए तो घोड़ा कभी उसे गिरने नहीं देता, लगातार उसी चाल से चलता रहता है।

इनका कहना है
कई अश्वपालकों की मांग होती है कि उनकी घोडि़यों से सिंधी नस्ल का बच्चा चाहिए। एेसे में बीकानेर केन्द्र में सिंधी घोडे़ को शीघ्र ही लाया जाएगा। जिसके सीमन से घोडि़यों में कृत्रिम गर्भाधान कर सकेंगे।

डॉ. एससी मेहता, प्रभारी अधिकारी, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र बीकानेर