
Spiritual actions are performed even when it is 100 years old
कालू. कस्बे के तेरापंथ भवन में विराजित शासनश्री साध्वी बिदामां के 101वें वर्ष में प्रवेश पर स्थानीय जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में तीन दिवसीय समारोह की शुरूआत शुक्रवार से होगी।
शुक्रवार को तेरापंथ भवन के पास बने नोहरे में साध्वी उज्ज्वल रेखा के सानिध्य में 'हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार विषयक कार्यक्रम होगा। इसमें मुख्य अतिथि आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष लूणकरण छाजेड़ होंगे। नाथूलाल चावत एवं सुरेश चावत मुख्य अतिथि होंगे। पन्नालाल पुगलिया मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में देश के कई हिस्सों से लोग पहुंचेंगे। वहीं 27 अक्टूबर को वर्तमान संदर्भ में श्रावक का दायित्व विषयक कार्यक्रम होगा। इसमें बीकानेर जिला उद्योग केन्द्र के संयुक्त निदेशक एवं महाप्रबन्धक राजेन्द्र सेठिया मुख्य अतिथि होंगे। धर्मचन्द चावत व प्रेमचन्द चावत विशिष्ट अतिथि होंगे तथा सूर्यप्रकाश श्यामसुखा मुख्य वक्ता होंगे। वहीं 28 अक्टूबर को साध्वी बिदामां का वर्धापन समारोह का आयोजन समाजसेवी नगराज बिरमेचा की अध्यक्षता में होगा। इसमें तेरापंथी महासभा के उपाध्यक्ष जसराज मालू मुख्य अतिथि होंगे। वहीं पूर्व जिला परिषद सदस्य मिटठालाल गन्ना, अखिल भारतीय तेयुप के अध्यक्ष विमल कटारिया, महामंत्री संदीप कोठारी एवं पूर्व अतिरिक्त मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी के.एल. सेठिया विशिष्ट अतिथि होंगे तथा विकास परिषद के सदस्य पदमचन्द पटावरी मुख्य वक्ता होंगे। इसी दिन कस्बे में संयम यात्रा रैली का भी आयोजन किया जाएगा।
100 वर्ष की होने पर भी दैनिक अध्यात्म क्रियाएं करती है साध्वीश्री
साध्वी बिदामां अपने शतायु के चरण में भी नियमित रूप से प्रतिदिन 13 घंटे का मौन, 9 घंटे का स्वाध्याय, आहार-संयम के तहत 7 द्रव्य से अधिक नहीं लेना, 3 विषय परिहार, नवकारसी करना, खुले में प्रत्याख्यान करना, तेरस और तीज तिथि का मौन सहित उपवास करना, प्रतिमाह 5 उपवास करना तथा प्रतिदिन जप, नमस्कार महामंत्र, नवपद आदि माला जप करना आदि की दिनचर्या पूर्ण करती है। यह भी एक विशेष बात है कि उन्होंने अपने 100 वर्षीय जीवनकाल में कभी किसी प्रकार की औषधि का सेवन नहीं किया। तेरापंथ धर्मसंघ में शतायु प्राप्त करने वाल साध्वी का रिकॉर्ड बनाने के कारण एवं तपस्वी जीवनचर्या रखने से लोगों की अथाह श्रद्धा उनके प्रति देखने को मिल रही है। उनके दर्शन के लिए दूरदराज से लोग कालू पहुंच रहे हैं। उनका वैराग्य जीवन सबसे लम्बा माना जा रहा है।
शतायु साध्वी बिदामां का जीवन वृत
साध्वी बिदामां का जन्म मेवाड़ के सरेवड़ी ग्राम में कार्तिक पक्ष चतुर्थी विक्रम संवत 1975 को विरधीचंद चावत के घर हुआ। उनका 14 वर्ष की उम्र में विवाह कर दिया गया, लेकिन विवाह के मात्र छह माह बाद ही जीवनसाथी की अकाल मृत्यु हो गई। इसके बाद मेवाड़ यात्रा में आचार्य कालूगणी के सानिध्य में उनमें वैराग्य भाव जागृत हुए। विक्रम संवत 1998 कार्तिक कृष्ण नवमी को राजलदेसर में उन्होंने जैन साध्वी की दीक्षा ग्रहण की। इसके बाद लगातार 77 वर्षों से धर्मसंघ में संयम की यात्रा करते हुए आत्मकल्याण पथ पर अग्रसर है। वे 98 वर्ष की आयु में भी ग्रामानुग्राम विचरण करती रही तथा 99 वर्ष की होने पर उनकी शारीरिक दुर्बलता देखकर आचार्य महाश्रमण ने उन्हें ग्राम कालू में स्थिरवास करने की आज्ञा दी। आचार्य महाश्रमण ने उन्हें शासनश्री उपाधि से सम्मानित किया। साध्वी बिदामां को तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य कालूगणी, आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ व आचार्य महाश्रमण की सेवा का अवसर मिला तथा जयाचार्य से लेकर आचार्य महाश्रमण तक 8 आचार्यों द्वारा दीक्षित साधु-साध्वियों के दर्शन एवं साक्षात्कर का सुयोग भी मिला।
Published on:
26 Oct 2018 12:41 am
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