
निराश्रित गोवंश के ठोर का निर्माण कार्य शुरू
नोखा. शहर के मुख्य मार्गों, गली-मोहल्लों में घूमते हुए निराश्रित गोवंश अब नजर नहीं आएंगे। उनके लिए एक स्थान पर चारे-पानी की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए रायसर रोड पर गोचर भूमि में चारदीवारी निर्माण सहित अन्य कार्य शुरू कर दिए हैं। नगरपालिका की ओर से एक करोड़ ५० लाख की लागत से यह कार्य करीब तीन-चार माह में पूरा हो जाएगा। शुक्रवार को पूर्व संसदीय सचिव केएल झंवर ने गोचर भूमि में पूजन कर चारदीवारी के निर्माण कार्य का शुभांरभ किया।
इस दौरान नगरपालिका अध्यक्ष नारायण झंवर, उपाध्यक्ष निर्मल भूरा, ईओ चंद्रप्रकाश सारस्वत, डॉ. सीताराम पंचारिया, कैलाश झंवर, मांगीलाल धामू, ब्रजलाल बिश्नोई, ओमप्रकाश ज्याणी, रामनिवास बिश्नोई, संतोष कुमार सारस्वत, मानाराम सुथार, पालिका जगदीश मांझू, सुखराम भादू, भागीरथ सारस्वत, सहायक प्रशासनिक अधिकारी राजूराम चौधरी, कनिष्ठ सहायक मूलचंद सेवग सहित प्रबुद्ध लोग मौजूद थे।
१.५ करोड़ की लागत से होंगे ये कार्य
रायसर रोड़ पर गोचर भूमि में से ५.६० हेक्टेयर भूमि नगर पालिका को आवंटित हुई है। इस गोचर भूमि के खसरा नंबर २६० में नगरपालिका की ओर से प्रथम फेज में एक करोड़ ५० लाख रुपए खर्च कर चार दीवारी व टिनशेड हॉल का निर्माण, चारा-पानी के लिए खेळी, चारा रखने के लिए चारागृह का निर्माण कार्य कराया जाएगा।
ग्रेवल सड़क बनाई जाएगी
पालिकाध्यक्ष नारायण झंवर ने बताया कि मुख्य रोड़ से गोचर भूमि में अंदर तक आने-जाने के लिए एक ग्रेवल रोड़ का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा यहां पर निराश्रित पशुओं को पानी पिलाने के लिए एक ट्यूबवैल व जलहौद का निर्माण भी कराया जाएगा। इस पशुशाला का संचालन व संधारण का कार्य रजिस्टर्ड संस्था की ओर से किया जाएगा।
निराश्रित गोवंश सेवा समिति करेगी देखभाल
निराश्रित गोवंश सेवा समिति की ओर से कस्बे में विचरण करने वाले निराश्रित गोवंश की देखभाल व उनका रखरखाव किया जाएगा। इसके लिए कस्बे व तहसील के भामाशाहों व प्रबुद्ध लोगों से आर्थिक सहयोग लिया जाएगा।
शहर में करीब दो हजार निराश्रित गोवंश
मोटे तौर पर नोखा शहर में करीब दो हजार से अधिक निराश्रित गोवंश विचरण करते हैं। बाजारों में खाने को मिलने के कारण यहां पर बहुतायत होती है। ये पशु भूख-प्यास मिटाने के लिए मुख्य मार्गों, गली-मोहल्लों में घूमते रहते हैं। कई बार तो राहगीरों को भी चोटिल कर देते हैं। पशुशाला का निर्माण होने पर इनको ठोर मिलेगा, तो चारे-पानी की व्यवस्था भी हो जाएगी। इससे पशुओं से होने वाले हादसों में कमी आएगी, वहीं शहर की बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा।
Published on:
09 Mar 2019 06:30 am
