
पत्रिका फाइल फोटो
Teacher Education Crisis: राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की ओर से सत्र 2026-27 से बीए-बीएड और बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम बंद कर दिए जाने के बाद शुरू किए गए एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) को लेकर राजस्थान में स्थिति चिंताजनक बन गई है। प्रदेश के 440 महाविद्यालयों ने आईटीईपी के लिए आवेदन किया, लेकिन अब तक सिर्फ 4 संस्थानों को ही मान्यता मिल पाई है।
ऐसे में शिक्षक शिक्षा के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अब तक जिन संस्थानों को एनसीटीई से आईटीईपी की मान्यता मिली है, वे हैं आईआईटी, जोधपुर, केंद्रीय विश्वविद्यालय, किशनगढ़ (अजमेर), राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर व एनसीईआरटी क्षेत्रीय कार्यालय, अजमेर। बाकी 436 कॉलेज अभी भी मान्यता के इंतजार में हैं, जबकि सभी ने आवेदन कर रखा है।
आईटीईपी की सीमित उपलब्धता के कारण विद्यार्थियों के पास फिलहाल डीएलएड ही प्रमुख विकल्प बचा है। इसी कारण डीएलएड प्रवेश परीक्षा में 6.50 लाख आवेदन हुए हैं। जबकि आईटीईपी में प्रवेश के अवसर बेहद सीमित हैं। नई व्यवस्था के बीच विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार आईटीईपी पारंपरिक कोर्स से अधिक उपयोगी है। क्योंकि 4 साल में स्नातक बीएड पूरा हो जाता है। जबकि पारंपरिक रास्ते में 3 साल ग्रेजुएशन 2 साल बीएड यानी 5 साल लग जाते हैं। साथ ही, 2030 के बाद बीएड और डीएलएड को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की दिशा में भी एनसीटीई काम कर रहा है।
आईटीईपी की मान्यता के लिए एनसीटीई ने कड़े मानक तय किए हैं, जिन पर कई संस्थान खरे नहीं उतर पा रहे। दरअसल, संस्थानों की मान्यता के लिए संबधित संस्थान को आवेदन में ये बताना जरूरी है कि संस्थान यूजीसी की किस धारा के तहत संचालित है। नैक से कौनसा ग्रेड प्राप्त है। संस्थान में कौन-कौन से विषय संचालित हैं। राष्ट्रीय रैंकिंग के किस पायदान पर है। संस्थान कितने वर्ष से संचालित है और भौतिक स्थिति कैसी है। वहां नेट औऱ पीएचडी जैसे योग्यताधारी फैकल्टी है या नहीं। नवाचार एवं अनुसंधान का स्तर कैसा है। ऐसे में मानक भी पूरे नहीं हो पाते।
शिक्षाविद प्रो. राजेंद्र कुमार श्रीमाली के अनुसार यदि समय रहते मान्यता नहीं मिली, तो विद्यार्थी आईटीईपी से वंचित रह जाएंगे और संस्थानों में कार्यरत कार्मिकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सशर्त मान्यता देकर अस्थायी राहत दी जाए, ताकि विद्यार्थियों और कर्मचारियों को नुकसान न हो।
Updated on:
22 Mar 2026 12:06 pm
Published on:
22 Mar 2026 12:05 pm
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