
The art of glorifying Goddesses
बीकानेर. फड़ चित्रकारी को अन्तर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले कलाकार सत्यनरायण जोशी ने कहा है कि लोक देवताओं की जीवनगाथा को साकार करने वाली फड़ चित्रकारी को आज संरक्षण की दरकार है। लुप्त प्राय:हो रही राजस्थान की यह लोककला (फड़ पेटिंग) सात समन्दर पार भी पहचान रखती है। इसके बावजूद इसका अस्तित्व बचाने के लिए उनका घराना संघर्ष कर रहा है।
बीकानेर में फड़ पेटिंग कार्यशाला कर रहे जोशी ने बताया कि यह कला 800 साल पुरानी है। इसमें मोटेतौर पर लोक देवता पाबूजी राठौड़, देवनारायणजी, वीर तेजाजी, गोगाजी, रामदेवजी की जीवनगाथा, उनके जन्म से लेकर अंतिम समय तक के घटनाक्रम, कालखंड का वर्णन पेटिंग के माध्यम से साकार करते है। फिर उसको भोपा-भोपी (विशेष गायन शैली) चित्रों को देखकर गाते हैं। वर्तमान में यह कला चितौड़, भीलवाड़ा, शाहपुरा में प्रसिद्ध है। प्रदेश में आज भी सत्यनारायण जोशी का परिवार ही फड़ चित्रकारी करता है।
सबसे लम्बी लोकदेवता देवनारायणजी की फड़
जोशी बताते है कि सबसे लंबी फड़ गुर्जर समाज के आराध्य देव लोकदेवता देवनारायण की फड़ है, जो 35 फीट लंबी तैयार होती है। इसे बनाने में 20 दिन लगते है। इसके अलावा पाबूजी व अन्य लोक देवताओं की फड़ 20 फीट लंबी होती है। ये आठ से दस दिन में तैयार हो जाती है। फड़ चित्र बनाने के लिए रेजी (मोटा) का कपड़ा काम में लिया जाता है। जिस पर मैदा का कलप लगाकर घुटाई करते हैं, फिर प्राकृतिक मिट्टी के कलर से पेटिंग बनाते हैं।
विद्यार्थियों को दे रहे प्रशिक्षण
जोशी बताते है कि पाबूजी की फड़ (पेटिंग) बनाकर रखते है, फिर उसे भोपा समुदाय के लोग खरीदकर ले जाते हैं, लेकिन वो पेटिंग उनके पास लंबे समय तक रहती है। घरों में विवाह-शादी के दौरान भित्ति चित्र बनाकर अपना गुजर-बसर कर रहे है। इस कला का अस्तिव बचा रहे, इसके लिए स्कूल व घर पर बच्चों को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
सरकार से नहीं सहयोग
जोशी ने बताया कि वर्तमान में सरकार से किसी तरह का प्रोत्साहन नहीं है। स्पिक मैके सहित कई अन्य संस्थाएं है, जिनकी वजह से इस कला को बचाए हुए हैं। आकर्षक पेटिंग हर किसी को अपनी लुभाती है, आज प्रधानमंत्री के आवास में भी फड़ पेटिंग शोभा बढ़ा रही है।
Published on:
28 Sept 2018 11:51 am
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