अध्यक्ष संदीप साह के अनुसार, पंचमी से दशमी तक महोत्सव मनाया जाता है। इसमें बोधन, कल्परंभ, अधिवास, पुष्पांजलि, संध्या आरती, बलिदान, हवन, दर्पण बिसर्जन, सिंदूर उत्सव और मूर्ति विसर्जन जैसी परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन होता है।इस वर्ष 2025 में पंचमी 27 सितंबर, महाषष्ठी 28 सितंबर, महासप्तमी 29 सितंबर, महाअष्टमी 30 सितंबर, महानवमी 1 अक्टूबर, और दशमी 2 अक्टूबर को विसर्जन और संबंधित कार्यक्रम होंगे।