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प्रदेश के बारह इंजीनियरिंग कॉलेज होंगे सरकारी, तकनीकी शिक्षा विभाग बना रहा नियम

प्रदेश में 12 स्ववित्त पोषित इंजीनियरिंग कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों में बदलने की कवायद शुरू की गई है।

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इंजीनियरिंग कॉलेज

निखिल स्वामी/बीकानेर. प्रदेश में १२ स्ववित्त पोषित इंजीनियरिंग कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों में बदलने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए सरकार ने तकनीकी शिक्षा विभाग से प्रस्ताव मांगे हैं। विभाग इन कॉलेजों को सरकार में लाने के लिए नियम कायदे बना रहा है। इन नियमों को सरकार के पास भेजा जाएगा। सरकार ने पहले चरण में तीन इंजीनियरिंग कॉलेजों को सरकारी बनाने के लिए नियम बना रही है।

सरकार की मंशा है कि इसी साल इन कॉलेजों को सरकारी बना दिया जाए। प्रदेश में अभी तक एक भी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं है। यहां सभी स्ववित्त पोषित इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जो खुद अपना खर्चा उठाते हैं और छात्रों को शिक्षा देते हैं। इन कॉलेजों में बच्चों की फीस ज्यादा है, जबकि वहां पढ़ाई गुणवत्तापूर्ण नहीं होती और प्लेसमेंट भी नहीं होता है। इससे अच्छे छात्र आगे नहीं बढ़ पाते हैं। इस वजह से छात्रों ने सरकार से कई बार सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की मांग भी की। इसे देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।

बीकानेर के दो कॉलेज हो सकते हैं संघटक
बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय की स्थापना व कुलपति की नियुक्ति होने से अब इंजीनियरिंग कॉलेज, बीकानेर और कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी को संघटक कॉलेज बनाने की कवायद भी चल रही है। इससे यह दोनों कॉलेज बीटीयू के अधीन हो जाएंगे। संघटक कॉलेज होने से यहां की व्यवस्था में सुधार होगा।

ये कॉलेज होंगे सरकारी
अजमेर के दो, भरतपुर, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, झालावाड़, बारां, करौली और धौलपुर का एक-एक कॉलेज सरकारी करने तैयारी की जा रही है। पहले चरण में महिला इंजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर, इंजीनियरिंग कॉलेज झालावाड़ और इंजीनियरिंग कॉलेज बारां सरकार के अधीन होने की संभावना है। दूसरे व तीसरे चरण में तीन-तीन कॉलेजों को सरकारी बनाया जाएगा।

10-15 दिन में भेजेंगे
पहले चरण में तीन इंजीनियरिंग कॉलेज सरकारी होंगे। इन कॉलेजों को सरकार के अधीन लाने के लिए नियम बनाकर दस-पन्द्रह दिन में सरकार को भेज दिए जाएंगे।
पुष्पा सत्यानी, संयुक्त शासन सचिव, तकनीकी शिक्षा राजस्थान