4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

वह शहर जहां होती है गणगौर दौड़

बीकानेर. यूं तो देश में विभिन्न स्थानों पर गणगौर पर्व पारम्परिक तरीकों से मनाया जता है, लेकिन बीकानेर का गणगौर उत्सव अनूठा और जग प्रसिद्ध है।
2 min read
Google source verification
The town where the gangaur race is

वह शहर जहां होती है गणगौर दौड़

विमल छंगाणी
बीकानेर. सुरीले गीत, पारम्परिक रस्में और मनमोहक प्रतिमाओं के पूजन का पर्व है गणगौर। होली के दिन से शुरु होने वाले इस पर्व का महिलाओं में विशेष महत्व है। शहर से लेकर गांव और ढाणी तक का माहौल गणगौर के सतरंगी माहौल से सराबोर रहता है। यूं तो देश में विभिन्न स्थानों पर गणगौर पर्व पारम्परिक तरीकों से मनाया जता है, लेकिन बीकानेर का गणगौर उत्सव अनूठा और जग प्रसिद्ध है। घर-घर में मां गवरजा का पूजन, गली-मोहल्लों और चौक-चौराहों पर गणगौरी गीतों की गूंज, बासा, दांतणिया और घुड़ला घुमाने की रस्मों का निर्वहन, मेले और पुरुषों की ओर से गाए जाने वाले गणगौर के गीत बीकानेर के गणगौर उत्सव की विशेष पहचान है वहीं गणगौर पूजन उत्सव में सबसे

अनूठी है यहां की पारम्परिक गणगौर दौड़
रियासतकाल से चल रही इस गणगौर दौड़ में पुरुष अपने सिर पर गणगौर प्रतिमा को रखकर दौड़ लगाते हैं। दौड़ते समय एक युवक दूसरे युवक को यह प्रतिमा देता रहता है और दौड़ जारी रहती है। चौतीना कुआं से शुरू होने वाली यह दौड़ भुजिया बाजार क्षेत्र तक होती है। इस दौरान सड़क के दोनों और खड़े हजारों शहरवासी दौड़ में शामिल होने वाले युवकों का उत्साह बढ़ाते हैं। इस आयोजन से जुडे़ शिवशंकर भादाणी बताते हैं कि करीब ढाई सौ सालों से यह परम्परा चल रही है। इसमें भादाणी (पुरोहित) पंचायत ट्रस्ट की गणगौर प्रतिमा शामिल होती है। इस बार इस गणगौर दौड़ का आयोजन ९ अप्रेल को होगा।

मुंह पीछे, नहीं रूकती
गणगौर दौड़ आयोजन से सत्तर सालों से जुडे़ घेटड़ महाराज ओझा बताते हैं कि जैसे ही बीकानेर राज परिवार की गणगौर शाही लवाजमें के साथ चौतीना कुआं के पास पहुंचती है, उसी समय भादाणी जाति की गणगौर दौड़ शुरू हो जाती है। दौड़ के समय गणगौर का मुंह पूर्व दिशा की ओर होता है, जबकि जिस युवक के सिर पर यह प्रतिमा होती है वह पश्चिम दिशा की ओर दौड़ लगाता है। दौड़ शुरू होने के बाद नहीं रूकती है। भुजिया बाजार में पंचायती की चौकी के पास पहुंचकर ही यह दौड़ पूरी होती है। दौड़ पूरी होने के बाद मां गवरजा का स्तुती गान कर सभी के लिए मंगल कामनाएं की जाती है। महिलाएं 'म्हे तो गवर भोळाय घर आय गया राजÓ गीत गाती है।

तीन किमी लम्बी दौड़
चौतीना कुआं से शुरु होने वाली यह दौड़ महात्मा गांधी मार्ग, कोटगेट, नया कुआं, ठंठेरा बाजार, रांगड़ी चौक होते हुए भुजिया बाजार क्षेत्र तक होती है। करीब तीन किमी दूरी की दौड़ से आठ दिन पहले शीतला अष्टमी के दिन गणगौर प्रतिमा को बाहर निकाला जाता है और बारीदार के घर गणगौर प्रतिमा पहुंचती है। मथेरण कलाकार रंग करते हैं और प्रथम नवरात्रा के दिन गणगौर को पारम्परिक आभाूषणों और वस्त्रों से सजाया जाता है। गणगौर प्रतिमा भादाणी जाति के हर घर-परिवार के यहां पहुंचती है और खोळा भरवाने की रस्म होती है।

बड़ी खबरें

View All

बीकानेर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग